संवाद सहयोगी, गोड्डा : ग्रामीण विकास ट्रस्ट-कृषि विज्ञान केंद्र के सौजन्य से कस्तूरिया पंचायत भवन में विश्व मृदा दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्व मृदा दिवस कार्यक्रम की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र में सभी सदस्य देशों की सहमति से प्रत्येक वर्ष 5 दिसम्बर को मनाना सुनिश्चित किया गया। पहला विश्व मृदा दिवस 5 दिसम्बर 2013 को विश्व भर में मनाया गया। कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. रितेश दुबे ने किसानों को बताया कि विश्व मृदा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। कहा कि खेती करने से पूर्व मिट्टी की जांच अवश्य कराना चाहिए। गोड्डा जिले की मिट्टी बलुई दोमट तथा प्रकृति अम्लीय है। मिट्टी की अम्लीयता दूर करने के लिए खेत में चूना (डोलोमाइट) का प्रयोग करके जुताई करें। किसानों से मिट्टी की जांच कराने का आह्वान किया। मिट्टी की जांच कराने से मिट्टी की प्रकृति, गोबर की खाद, यूरिया, डीएपी, पोटास की सही मात्रा में प्रयोग करने की संस्तुति मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दर्ज रहती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड तीन वर्ष के लिए वैद्य रहता है।

गृह वैज्ञानिक डॉ. प्रगतिका मिश्रा ने मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने हेतु जैविक खाद का अधिक प्रयोग, गोमूत्र, गोबर तथा नीम की पत्तियों से कीटनाशी बनाने की विधि बताई। घर में कम्पोस्ट बनाने के लिए वेस्ट डीकम्पोजर की प्रयोग विधि बताई। कार्यक्रम के अंत में बैंगन, टमाटर, ब्रोकली एंव शिमला मिर्च के बिचड़ा तथा मिष्ठान महिला-किसानों के बीच वितरित किया गया। संचालन उद्यान मित्र प्रदीप कुमार ने किया। कार्यक्रम में संझली टुडू, सुहागिनी किस्कू, जुलियाना मरांडी, विजय महतो, शंकर सोरेन समेत 70 महिला-पुरुष किसान सम्मिलित हुए।

Posted By: Jagran

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