ट्यूशन के पैसों से खरीदी किट, बीआईटी छोड़ खेल को चुना; गोड्डा की मोनालिसा ने 2,000 बच्चों को सिखाया नेटबॉल
गोड्डा की नेटबॉल खिलाड़ी मोनालिसा ने ट्यूशन के पैसों से किट खरीदकर और संघर्षों का सामना करते हुए 1500-2000 बच्चों को नेटबॉल सिखाया है।

गोड्डा की मोनालिसा ने 2,000 बच्चों को सिखाया नेटबॉल
HighLights
ट्यूशन के पैसों से किट खरीदकर नेटबॉल सिखाया।
गोड्डा की मोनालिसा ने 2000 बच्चों को प्रशिक्षित किया।
संघर्षों के बावजूद नेटबॉल को नई पहचान दिलाई।
अविनाश, गोड्डा। साधारण पहाड़िया परिवार में जन्म लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना और फिर उसी खेल के माध्यम से सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवारना आसान नहीं है। गोड्डा की नेटबाल खिलाड़ी मोनालिसा ने अपने संघर्ष, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह कर दिखाया है। कभी ट्यूशन से मिले पैसों से खेल किट खरीदकर बच्चों को अभ्यास कराने वाली मोनालिसा आज संताल परगना में नेटबाल को नई पहचान दिला रही हैं।
उनके मार्गदर्शन में करीब 1500 से 2000 बच्चे और बच्चियां नेटबाल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। वहीं, जिले के करीब 150 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपने खेल करियर को आगे बढ़ा चुके हैं।
बीआईटी में चयन के बाद भी खेल को बनाया करियर
मोनालिसा के लिए खेल का सफर चुनौतियों से भरा रहा। परिवार के सदस्य उन्हें पढ़ाई के लिए बाहर भेजना चाहते थे। बीआईटी में चयन होने के बाद भी उन्होंने नेटबाल को अपना करियर बनाने का फैसला किया। वर्ष 2008 से नेटबाल में सक्रिय मोनालिसा ने लगातार मेहनत कर अपनी प्रतिभा साबित की।
धनबाद में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। वह संताल परगना से नेटबाल खेलने वाली पहली खिलाड़ी बनीं। आज वह राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी झारखंड की पहचान बन चुकी हैं। वह दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए क्वालिफाई कर चुकी हैं।
ट्यूशन के पैसों से खरीदा किट, बांस के पोल से कराया अभ्यास
संताल परगना में नेटबाल को बढ़ावा देने के लिए मोनालिसा ने खुद के संसाधनों से शुरुआत की। बच्चों को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने ट्यूशन से मिले पैसों से खेल किट खरीदी। संसाधनों की कमी के बीच बांस के पोल और टेबल फैन के रिंग से अभ्यास की व्यवस्था की।
शुरुआती दौर में खिलाड़ियों को खेलने और अभ्यास कराने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय स्तर पर विरोध और बाधाओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर खिलाड़ियों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की मांग भी की।
खिलाड़ियों को मिला रोजगार, कई बेटियों ने बनाई पहचान
मोनालिसा की मेहनत का असर अब दिखने लगा है। नेटबाल में प्रशिक्षण लेने वाले कई खिलाड़ी खेल और खेल कोटे के माध्यम से रोजगार हासिल कर चुके हैं। इनमें असम पुलिस, अग्निवीर, नौसेना और चौकीदार के पदों पर चयनित खिलाड़ी शामिल हैं। इससे क्षेत्र के बच्चों और विशेषकर बेटियों के बीच खेल के प्रति रुचि बढ़ी है। स्कूलों और संस्थानों से सहयोग मिलने के बाद नेटबाल का दायरा भी लगातार बढ़ा है।
आठ पदक और कप्तान के रूप में भी शानदार प्रदर्शन
मोनालिसा अब तक राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में आठ पदक जीत चुकी हैं। ईस्ट जोन प्रतियोगिताओं में चार बार कप्तान के रूप में हिस्सा लेकर सिल्वर और ब्रांज पदक हासिल किए। वहीं, इंटर जोनल प्रतियोगिताओं में तीन बार कप्तानी करते हुए अपने जोन को पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मोनालिसा का लक्ष्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीतकर देश, राज्य और जिले का नाम रोशन करना है। अपनी इस यात्रा में वह कोच गुंजन झा, पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार साह, पिता बैद्यनाथ देहरी और अपनी दिवंगत मां प्रतिभा देहरी के योगदान को महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका संघर्ष आज उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।
