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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 01, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सभी मवेशियों की होगी टैगिग, जारी होगा यूआइडी नंबर

By JagranEdited By:
Published: Tue, 01 Dec 2020 08:20 PM (IST)

गोड्डा जिले के विभिन्न प्रखंडों में पशुओं के आधार कार्ड (टैगिग) का काम हो रहा है।

सभी मवेशियों की होगी टैगिग, जारी होगा यूआइडी नंबर
सभी मवेशियों की होगी टैगिग, जारी होगा यूआइडी नंबर

गोड्डा : जिले के विभिन्न प्रखंडों में पशुओं के आधार कार्ड (टैगिग) का काम हो रहा है। यह काम नजदीकी पशुपालन कार्यालय से कराया जा सकता है। इससे कई पशुपालकों को कई प्रकार के संबंधित लाभ मिलेंगे। टैगिग के बाद पशुओं के लिए नेशनल डाटा बेस तैयार होगा। कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं की गर्भ जांच, टीकाकरण, चिकित्सा, पशु हाट में पशुओं की खरीद बिक्री की जानकारी, पशुओं की वंशावली के बारे में जानकारी के अलावा पशु खो जाने या चोरी हो जाने से इसकी मदद से पशु को खोजने की सुविधा तथा पशु के अवैध व्यापार को रोकने में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पशुओं को कब टीका पड़ा, कब नहीं यह जानकारी भी विभाग के पास होगी।

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प्रदेश के सवा करोड़ पशुओं की होगी टैगिग : जानकारी के अनुसार झारखंड में करीब सवा करोड़ गाय-भैंसों का आधार कार्ड बनाने का टारगेट है। यह काम पांच वर्ष में पूरा करने की योजना है। पहले केवल दुधारू गायों के लिए आदेश मिला था। इसकी अनुमानित संख्या करीब 35 लाख है। नए गाइडलाइन के तहत पूरे प्रदेश में सवा करोड़ पशुओं को टैगिग करने का काम करना है। बीते माह में तक करीब 10 लाख पशुओं का आधार कार्ड बनाया जा चुका है। जबकि देश में 30 करोड़ से अधिक गाय भैंस हैं। अभियान चलाकर इसकी टैग की जाएगी। इसके बाद भेड़, बकरी आदि पशुओं का आधार बनाया जाएगा। आधार कार्ड में यूनिक नंबर, मालिक के विवरण, पशुओं का टीकाकरण और ब्रीडिग की जानकारी शामिल होगी। क्या है पशु आधार : पशुओं की टैगिग ही उनका आधार कार्ड है। अब देश भर की हर गाय, भैंस के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर जारी होगा। इसके जरिए पशुपालक घर बैठे अपने पशुओं के बारे में सॉफ्टवेयर के जरिए जानकारी ले सकेंगे। टीका कराना, नस्ल सुधार कार्यक्रम, चिकित्सा सहायता सहित अन्य काम आसानी से हो पाएंगे। देश में पशुधन की जानकारी से संबंधित एक डेटाबेस बनाया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि पशुधन के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाई जाए। केंद्रीय पशुपालन विभाग के मुताबिक अगले डेढ़ साल में लगभग 50 करोड़ से अधिक मवेशियों को उनके मालिक उनकी नस्ल एवं उत्पादकता का पता लगाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यूनिक आईडी दी जाएगी। मवेशियों के कान में आठ ग्राम के वजन वाला पीला टैग लगाया जाएगा। इसी टैग 12 अंकों का आधार नंबर चस्पा होगा।

---------------------------------------------- जिले में गाय, बैल, भैंस, पाड़ा आदि मवेशियों का टैगिंग कराया जा रहा है। मवेशियों को वैक्सीन को लगाया जा रहा है। इससे भविष्य में मवेशी पालकों को भविष्य में कई प्रकार की सुविधा मिलेगी। सरकार द्वारा पशुपालकों व किसानों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण निर्णय है। इससे मवेशियों के लिए डिजिटल प्लेटफार्म तैयार होगा व मवेशी की तस्करी पर लगाम लगेगी।

- डॉ विनय कुमार झा, प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी, गोड्डा।