मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

गोड्डा : इस बार मानसून की वर्षा नहीं होने के कारण नदी, तालाब सहित अन्य जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्र में जल संरक्षण नहीं हो पाया है। इस कारण सिचाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। खेतों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण आजतक बिचड़ा भी नहीं लग पाया है। वर्षा के मौसम में भी लोगों को प्रचंड धूप सहनी पड़ रही है। जिले की अधिकतर नदियां पहाड़ी क्षेत्रों से निकलती है। पहाड़ी क्षेत्र में बेहतर वर्षा होने से इन नदियों में पानी उतरता है। अधिकांश नदियों से बालू उठाव करने से जल ग्रहण क्षेत्र में जल संरक्षण की क्षमता क्षिण हो गयी है। नदियां भी अब मैदान जैसी लगने लगी है। पिछले दो तीन साल से वर्षा ही नहीं हो रही है। हाल में दर्जनों पोखर व जलाशयों का जीर्णोद्धार हुआ है लेकिन वर्षापात के अभाव में अबतक जल संग्रहण नहीं हो पाया है।

------------------

अब मानसून पर ही आसरा :: गोड्डा: जिले के सभी क्षेत्रों में इन दिनों किसान वर्षा का ही इंतजार कर रहे हैं ताकि धनरोपणी व नर्सरी का कार्य शुरू किया जा सके। इस संबंध में घाटबंका के मुखिया राजकुमार भगत, समाजसेवी मुकेन्द्र भगत, चुनका मुर्मू, रेवती दवी, हरिनाथ सिंह आदि का कहना है कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का ही यह नतीजा है कि वर्षा नहीं हो रही है। नदियों का बालू उठाव करने से नदी किनारे रहने वाले किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। नदी में बालू रहने से किसान किसी तरह अपना खेती बारी कर लेते थे। अब बालू उठाव के बाद ऐसी स्थिति हो गयी है कि नदी में अब पानी का संरक्षण नहीं हो पाता है। स्थिति यह है कि डांड भी बेकार हो गया है। कोई दूसरा विकल्प भी नहीं बचा है। यहां तक कि मवेशियों को भी जल के लिए दूर- दूर तक ले जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति जीवन में पहली बार देखने को मिल रही है। सरकार व जन प्रतिनिधि सिर्फ योजनाओं का शिलान्यास में ही लगे रहते हैं। जरूरत है किसानों के लिए सिचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक पहल करने की।

------------

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप