संवाद सहयोगी, बोआरीजोर : कुपोषण एक बड़ी चुनौती है परंतु एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए इससे निजात पाना भी जरूरी है। यहां के वन उपज एवं स्थानीय कृषि उत्पादों के प्रबंधन तथा इसके उपयोग से कुपोषण दूर हो सकता है। इसके लिए हर परिवार को आगे आना होगा। उक्त बातें स्वंयसेवी संस्था साथी एवं पीएचएफ के संयुक्त तत्वावधान में प्रखंड सभागार में पारंपरिक कृषि उत्पाद एवं वन उपज के स्थानीय पोषण प्रबंधन विषय पर आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि प्रखंड प्रमुख चन्दर हांसदा ने कही।

उन्होंने कहा कि यह पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्र है परंतु संसाधन काफी हैं। उसके प्रबंधन एवं उपयोग के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। सरकार भी अपने स्तर से काफी प्रयास कर रही है। साथी का यह प्रयास निश्चित इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोआरीजोर के डॉ. विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग आप सभी के साथ है। जब भी हमारी जरूरत हो हम आएंगे। साथी के निदेशक डॉ. नीरज कुमार ने कार्यशाला में विषय प्रवेश करते हुए कहा कि साथी का एक प्रयास है हर व्यक्ति हर घर तक सही पोषण का संदेश पहुंचाएं। यानी पौष्टिक आहार, साफ पानी और सही प्रथाएं लोगों को बताएं और इसे जन आंदोलन का रूप दें। बोआरीजोर कुपोषण मुक्त प्रखंड बने इसके लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए मॉडल के तौर पर बोआरीजोर पंचायत के 14 गांव में व्यक्तिगत पोषण बाड़ी, सामूहिक पोषण बाड़ी, सामूहिक खेती कराने एवं ग्रेन बैंक निर्माण जैसे कार्यो को प्रोत्साहित किया जा रहा है। परियोजना समन्वयक सर्वरी मुखर्जी ने कुपोषण क्या है? यह कैसे होता है तथा इसकी रोकथाम के बारे में बताया। महिला पर्यवेक्षिका चंदा रविदास, क्रेज के राज्य समन्वयक कालेश्वर मंडल, जितेंद्र कुमार ने भी विचार रखे।

प्रखंड में लगी पोषण प्रदर्शनी:

साथी एवं पीएचएफ ने प्रखंड परिसर में पोषण प्रदर्शनी भी लगायी। जिसका उद्घाटन प्रमुख ने दीप प्रज्वलित कर किया। धन्यवाद ज्ञापन नरेंद्र कुमार एवं संचालन विभास चंद्रा ने किया ने किया। आंगनबाड़ी सेविका, पोषण सखी, केडर एवं पोषण सहायता समूह के लीडर सहित परियोजना कर्मी नीरज ठाकुर, काजल, मीनू, चन्द्रदेव, सुमित, बबलू, मृदुला, निर्मल आदि मौजूद थे।

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