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झारखंड का योगिनी धाम: जहां गिरी थी मां सती की जांघ, कामाख्या मंदिर की तर्ज पर होती है तांत्रिक पिंड पूजा

Published: Sat, 21 Mar 2026 02:21 PM (IST)

बसंती नवरात्र में गोड्डा के प्रसिद्ध मां योगिनी धाम में विशेष अनुष्ठान और साधना होती है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु ...और पढ़ें

HighLights

  1. बसंती नवरात्र में मां योगिनी धाम में विशेष अनुष्ठान।

  2. कामाख्या मंदिर की तर्ज पर तांत्रिक विधि से पिंड पूजा।

  3. 1000 वर्ष पुराना शक्तिपीठ, महाभारत काल से जुड़ा इतिहास।

नवीन कुमार, गोड्डा। बसंती नवरात्र में जिले के प्रसिद्ध् मां योगिनी धाम में विशेष अनुष्ठान, साधना व पूजन किया जाता है। यहां माता के दर्शन व पूजन को लेकर दूर- दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

मां योगिनी धाम गोड्डा-पीरपैती मुख्य मार्ग पर बारकोप पहाड़ी श्रृंखला के बीच प्रकृति की गोद में अवस्थित है। यहां सालों भर मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा होती है।

लोगों को रोग व्याधि से मुक्ति मिलती है। नवरात्र के अवसर पर इस मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ता है। कामख्या मंदिर की तर्ज पर योगिनी धाम में तांत्रिक विधि से पिंड पूजा होती है।

महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास

मंदिर की निर्माण शैली आसाम के कामाख्या मंदिर से मिलती -जुलती है। माता योगिनपी स्थान एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास 1000 वर्ष पुराना है। इसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां कुछ समय बिताया था।

मंदिर की विशेषताएं

माता योगिनी स्थान को 52 वां शक्तिपीठ माना जाता है, जो गुप्त था। यहां माता सती की बायीं जांघ गिरी थी। यह मंदिर तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध् है और कामाख्या मंदिर की तरह ही यहां भी पिंड की पूजा की जाती है।

jharkhand

मंदिर का गर्भगृह एक गुफा में है। जो पहाड़ की उंचाई पर है। इस गुफा में जाने के लिए एक संकरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। गर्भगृह धरातल से 1000 मीटर उंचाई पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि पहले यहां नर बलि की परंपरा थी, जिसे अंग्रेजों ने बंद करवा दिया था।

क्या कहते हैं व्यवस्थापक?

व्यवस्थापक बाबी सिंह कहते हैं कि समय के साथ- साथ सुविधाओं में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। माता के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। गर्भगृह जाने के लिए सीढ़ी की बेहतर व्यवस्था के साथ- साथ सफाई व सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था है। रामनवमी में तो नौ दिनों तक भव्य पूजन किया जा रहा है।

कैसे पहुंचें?

योगिनी मंदिर तक पहुंचने के लिए गोड्डा से पीरपैती मुख्य मार्ग पर 11 किमी दूरी पर योगिनी द्वार है। जहां से कुछ ही दूर अवस्थित है योगिनी मंदिर। पीरपैती से आने वाले पथरगामा के बाद एक किमी दूरी पर अवस्थित है। बस से या निजी सवारी से यहां तक पहुंच सकते हैं।

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