संवाद सहयोगी, पोड़ैयाहाट : प्रखंड परिसर मैदान में झारखंड विकास जनजाति मोर्चा ने बुधवार को धरना दिया। यहां विधायक प्रदीप यादव ने भाजपा भगाओ देश और आदिवासी बचाओ के नारे के साथ इस बार एक-एक वोट झारखंड विकास मोर्चा को देने की अपील की। कहा जब से भाजपा की सरकार आई है तब से आदिवासियों, गरीबों एवं आम लोगों पर अत्याचार बढ़ा है।

कहा कि किसी भी कीमत पर बांग्लादेश को बिजली जाने नहीं देंगे। इस देश का कानून है कि जो खेत को रोपता है फसल उसी की होती है। माली में किसानों की फसल रौंदनेवालों पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए। आज सारे लोग एकजुट होकर पूंजीपतियों के पक्ष में खड़े हैं। इसलिए जब तक इन्हें नहीं भगाएंगे तब तक गरीबों का राज नहीं आएगा। आदिवासियों को दिग्भ्रमित करने के लिए आज तरह-तरह के दलाल समाज में घूम रहे हैं।

आदिवासियों की एकता तोड़ने का प्रयास :

विधायक ने कहा कि वोट की राजनीति कर आदिवासियों की एकता को तोड़ने का प्रयास हो रहा है। इससे सावधान रहें। गंगा से पानी लाने में सैकड़ों गांव की जमीन जा रही है और सरकार एक पैसा मुआवजा नहीं दे रही है। अगर सरकार इन जमीनों का मुआवजा देती तो अडानी को 700 करोड़ रुपये मुआवजा देना पड़ता। पहले मेडिकल, इंजीनिय¨रग व अन्य तकनीकी शिक्षा के लिए जो फीस लगती थी, छात्रवृत्ति के माध्यम से उसे भुगतान हो जाता था। आज छात्रवृति की राशि काफी कम कर दी गई है। गरीब आदिवासियों के बच्चे अब बड़े-बड़े शिक्षण संस्थानों में नहीं पढ़ पा रहे हैं।

सरकार आदिवासी और गैर आदिवासी को लड़ा रही

सरकार आदिवासी और गैर आदिवासी को लड़ा रही है। आदिवासी और ईसाई के बीच झगड़ा कराकर वोट बैंक की राजनीति कर रही है। इस बार हमें झुकना नहीं है। अगर हम झुक गए तो हमारे बच्चे नौकरी के लिए तरसेंगे। इसलिए एकजुट होकर भाजपा को भगाना ही पड़ेगा।

एक्ट को बचाए रखने की चुनौती : केंद्रीय प्रवक्ता अंजुला मुर्मू ने कहा कि पूर्वजों के त्याग और बलिदान के कारण आज हमें एसपीटी एक्ट मिला है। उस एसपीटी एक्ट को बचाए रखने की चुनौती हम सभी आदिवासी भाई-बहनों के समक्ष है। एकजुट होकर भाजपा को हराएंगे तभी हमारा भला होगा। सरकार हमारी मांग नहीं मानती है तो हम लोग माली गांव में दिशोम वैसी करेंगे। परंपरागत हथियारों के साथ हम लोग बैठक कर निर्णय लेंगे। सूर्यनारायण हांसदा, रंजीत मरांडी, श्यामदेव हेंब्रम, विश्वजीत बास्की, जोसेफ बेसरा, मुंशीलाल सोरेन ,पौलुस मरांडी, मुकेश मुर्मू, शैलेंद्र किस्कू, महेंद्र टूडू, सूरज मरांडी, रीना सोरेन, बिटिया हांसदा, सूर्य नारायण हेम्ब्रम, सुशील आदि थे। सुगाथान व बासलोई नदी पर प्रस्तावित डैम को निरस्त करने की मांग की गई।

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