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गोड्डा में बड़ा फर्जीवाड़ा: खुद को प्रबंध समिति का सचिव बताकर अप्रशिक्षित शिक्षक को सौंपा प्रभार, निकाली लाखों की राशि

Published: Mon, 12 Oct 2026 12:18 AM (GMT+05:30)

गोड्डा के जनजातीय उच्च विद्यालय गांधीग्राम में विद्यालय प्रबंध समिति के फर्जी सचिव द्वारा लाखों रुपये के सरकारी अनुदान की अवैध निकासी और वितरण का गंभीर मामला सामने आया है।

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HighLights

  1. फर्जी सचिव ने लाखों के सरकारी अनुदान की अवैध निकासी की।

  2. अप्रशिक्षित शिक्षक को प्रभारी प्रधानाध्यापक नियुक्त किया गया।

  3. विरोध करने वाली शिक्षिका को फर्जी हाजिरी से हटाया।

संवाद सहयोगी, गोड्डा। जनजातीय उच्च विद्यालय गांधीग्राम में विद्यालय प्रबंध समिति का फर्जी सचिव बनकर लाखों रुपये के सरकारी अनुदान की अवैध निकासी और वितरण में भारी गड़बड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बासुदेव सोरेन नामक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने स्वयं को फर्जी तरीके से प्रबंध समिति का सचिव बताकर अप्रशिक्षित शिक्षक गणेश मुर्मू को प्रभारी प्रधानाध्यापक बना दिया और तीन वित्तीय वर्षों (2022-23, 2023-24 एवं 2024-25) के दौरान लाखों रुपये की राशि की निकासी की।

गौरतलब है कि नियमानुसार विद्यालय की प्रबंध समिति में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) भी सदस्य होते हैं, लेकिन इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है।

हाजिरी काटकर शिक्षिका को हटाने का आरोप

मामले की जानकारी देते हुए विद्यालय की सहायक शिक्षिका सह तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक बिंदु कुमारी ने बताया कि जब उन्होंने इस प्रक्रिया का विरोध किया, तो फर्जी उपस्थिति पंजी तैयार कर उन्हें फरवरी 2023 से मई 2023 तक अनुपस्थित दर्शाकर विद्यालय से हटा दिया गया।

उल्लेखनीय है कि 19 जनवरी 2023 को तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान भी जनवरी 2023 की शिक्षक उपस्थिति पंजी में फर्जीवाड़ा पाया गया था। इसके बावजूद शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिसके खिलाफ उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

हाईकोर्ट में दाखिल शपथपत्र से हुआ खुलासा

झारखंड उच्च न्यायालय में दायर वाद संख्या 31/2024 के तहत विद्यालय प्रबंधन द्वारा दाखिल काउंटर शपथपत्र में 12 फरवरी 2023 की बैठक की प्रति प्रस्तुत की गई है। 

इस बैठक में बासुदेव सोरेन को सचिव बनाने से जुड़ा कोई प्रस्ताव ही शामिल नहीं था। इसके अलावा बैठक में अधिकांश सदस्य अनुपस्थित थे, जिससे बैठक का आवश्यक कोरम भी पूरा नहीं हुआ था। 

कोरम पूरा न होने के बावजूद इसी बैठक के प्रस्ताव संख्या 01 के तहत अप्रशिक्षित शिक्षक को प्रभारी प्रधानाध्यापक बना दिया गया और इसका अनुमोदन जिला शिक्षा पदाधिकारी से भी नहीं कराया गया।

अनुदान नियमों की अनदेखी का आरोप

झारखंड सरकार की अनुदान नियमावली के अनुसार अप्रशिक्षित शिक्षकों को अनुदान राशि नहीं दी जा सकती। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर प्रभारी प्रधानाध्यापक गणेश मुर्मू और सहायक शिक्षक उज्जवल कुमार पाण्डेय सहित अन्य अप्रशिक्षित शिक्षकों के बीच अनुदान की राशि का वितरण किया गया।

शिक्षिका बिंदु कुमारी द्वारा समय-समय पर अधिकारियों को लिखित सूचना दिए जाने के बाद भी अब तक कार्रवाई न होने से कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।