विधु विनोद, गोड्डा : जब किसी व्यक्ति के विशेष अंग या अंगों में दोष उत्पन्न हो जाता है तो समाज उसे दिव्यांग के रूप में वर्गीकृत कर देता है। कुछ दिव्यांगों की सफलता एक ओर जहां प्रेरित करती हैं वहीं दूसरी तरफ प्रोत्साहन की कमी तथा सामाजिक तिरस्कार के कारण लाखों दिव्यांग स्वकेंद्रित एवं निरुद्देश्य जीवनशैली व्यतीत करने को विवश हैं। दिव्यांगों पर लोग जाने-अनजाने छींटाकशी करने से भी बाज नहीं आते, जिससे उनकी भावनाएं आहत होती है। एक निश्शक्त व्यक्ति की जिदगी किन किन दुश्वारियों से कटती है, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

गोड्डा जिले की बात करें तो यहां कोई 15 हजार दिव्यांग चिन्हित हैं। इनमें से केंद्र और राज्य सरकार की पेंशन योजना से कुल 7300 दिव्यांगों को जोड़ा गया है। इन 7300 लाभुकों को प्रति माह एक हजार रुपये की पेंशन मिलती है। देखा जाए तो जिले की कुल जनसंख्या का एक फीसद से भी कम दिव्यांग हैं। वहीं पूरे देश में दो करोड़ लोग दिव्यांग हैं। व्यवहार की धरातल पर इसे परखा जाए तो प्रति सौ लोगों में एक दिव्यांग हैं। जाहिर है कि यह समाज के लिए बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी समाज में दिव्यांगों की स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है। शिक्षा, स्वास्थ्य और संसाधन के साथ उपलब्ध अवसरों का लाभ उन्हें नहीं मिल पाया है।

------------------

सुधीर का संघर्ष गोड्डा के लिए प्रेरणास्त्रोत

गोड्डा के राजाभिठ्ठा निवासी दिव्यांग सुधीर कुमार बचपन में ही पोलियो के कारण अपना एक पैर गंवा बैठे थे। सुधीर कुमार राजाभिठा थाना क्षेत्र के आमझोर गांव के निवासी हैं और वर्तमान में बीएचयू के इतिहास विभाग में शोधार्थी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय में हुई। तत्पश्चात छठी से 12वीं की शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय ललमटिया में पूरी की। स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से की । वर्तमान में बीएचयू के इतिहास विभाग में शोधार्थी हैं। 2014 में 12वीं बोर्ड में भूगोल और इतिहास विषय में शानदार प्रदर्शन करने पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने उन्हें नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में सम्मानित किया था। सुधीर दो बार नेट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) और जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप ) के लिए भी चयनित हुए हैं। साथ ही लेखन के क्षेत्र में भी सुधीर आगे आए हैं। इनका लक्ष्य प्रोफेसर बनकर समाज में शिक्षा का प्रसार करना और दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

-----------------------------------------

समाज में यदि अपनत्व भरा वातावरण मिले, तो दिव्यांग जन भी इतिहास रच सकते हैं। हमारे सामने खगोलविद् स्टीफन हाकिग, पैरा ओलंपियन देवेंद्र झांझरिया, धावक आस्कर पिस्टोरियस, मशहूर लेखिका हेलेन केलर जैसी हस्तियों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने दिव्यांगता को मात देकर अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए खुद को स्थापित किया है। -सुधीर कुमार, बीएचयू के शोधकर्ता सह गोड्डा के राजाभिठ्ठा निवासी ।

-----------------------------------------------------------------

सरकार की ओर से दिव्यांग जनों को कृत्रिम उपकरण, ट्राइसाइकिल आदि अनुदान में दिए जा रहे हैं। इसका मकसद उन्हें स्वावलंबी बनाना है। इसके लिए अलावा जिले में करीब 7300 लाभुकों को दिव्यांगता पेंशन दी जा रही है। आधिकारिक आंकड़े के अनुसार जिले में करीब 15 हजार दिव्यांग हैं, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए सरकार आपके द्वार कार्यक्रम बेहतर प्लेटफार्म सिद्ध हो रहा है।

- अनिल टुडू, जिला सामाजिक सुरक्षा पदाधिकारी, गोड्डा।

Edited By: Jagran