गोड्डा : शहर के अनेक तालाबों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। चारों ओर से अतिक्रमण के साथ- साथ प्रदूषित होते जा रहे इन जल निकायों के जीर्णोद्धार के लिए मसीहा का इंतजार है। शिवपुर में रत्नेश्वर धाम मंदिर के ठीक बगल में अवस्थित है धोबिया तालाब, कभी इस तालाब के पानी का उपयोग आसपास के लोग स्नान करने, कपड़ा व बर्तन धोने में करते थे। यहीं तालाब जिला प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण इतना अधिक प्रदूषित हो गया है कि इसका पानी छूने मात्र से बीमारी होने की आशंका बनी रहती है। आलम यह है कि आसपास बसने वाली आबादी द्वारा धीरे-धीरे इसका अतिक्रमण किया जा रहा है। अगर समय रहते इसे नहीं बचाया गया तो अन्य तालाबों की तरह यह भी बीते दिनों की बात हो जाएगी। तालाब का इतिहास : स्थानीय सीताराम राउत बताते हैं कि यह तालाब रत्नेश्वर धाम मंदिर निर्माण के समय का है। बनैली स्टेट द्वारा शिवगंगा के पानी को पेयजल के रूप में इस्तेमाल करने उद्देश्य से ठीक बगल में एक दूसरा तालाब खोदा गया था जिसे धोबिया तालाब नाम दिया गया। इस तालाब के किनारे एक चंट्टान है जिसपर शिव खोजी दस्ता द्वारा शिव लिंग खुदाई का निशान भी है। यह ऐतिहासिक तालाब है। इसके संरक्षण के लिए जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

-------------------- क्या कहते हैं लोग तालाब का संरक्षण सामूहिक दायित्व है। तालाब का साफ-सुथरा रहना मानव के साथ-साथ ही जीव-जंतुओं के लिए भी वरदान साबित होता है। तालाब को संरक्षित करने व प्रदूषण मुक्त बनाने में समुदाय की अहम भूमिका है। तालाब का संरक्षण नहीं करने पर ही आज जल संकट से गुजरना पड़ रहा है।

संजना ¨सह, पूर्व पार्षद

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जल ही जीवन है। जल को संरक्षित करने के लिए ताल-तलैया व जल निकायों को बचाने की जरूरत है। बिना पोखर व तालाब के संरक्षण के भूजल का संरक्षण संभव नहीं है। इसलिए सभी को ईमानदार पहल करने की जरूरत है। नगर परिषद को भी इसके संरक्षण के लिए पहल करनी चाहिए।

श्यामाकांत झा, बुद्धिजीवी सह गोड्डा कालेज के पूर्व प्राचार्य

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विकास की अंधी दौड़ में तालाब भी जमींदोज हो रहे हैं। इसे कोई देखने वाला नहीं है। इसके लिए संरक्षण के लिए कठोर कदम उठाने होंगे। जल संरक्षण के लिए तालाबों को बचाना होगा। आमलोगों को इसके संरक्षण के लिए आगे आना होगा। नगर परिषद के पदाधिकारियों को भी इसकी ¨चता करनी होगी।

फिरोज आलम, व्यवसायी

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गहराते हुए जल संकट से हमें सबक लेने की जरूरत है। आसपास के क्षेत्र में अवस्थित जल निकायों को समुदाय के लोगों को संरक्षित करना चाहिए। तालाब में जल रहने से आसपास के लोगों को ही जल संकट से निजात मिलती है। इसके लिए जागरूकता की जरूरत है। जिला प्रशासन को समय- समय पर तालाबों के संरक्षण का अभियान चलाने की जरूरत है।

तनूज कुमार दुबे, अधिवक्ता

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तालाबों की सफाई के लिए नगर परिषद द्वारा अभियान चलाया जा रहा है जबकि जीर्णोद्धार व अतिक्रमण मुक्त करने के लिए नगर परिषद के पास कोई फंड नहीं है।

जितेंद्र मंडल, नगर परिषद अध्यक्ष, गोड्डा

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Posted By: Jagran

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