विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गोड्डा की दर्शना मैडम बनीं छात्राओं की 'रोल मॉडल', ड्रॉपआउट बेटियों को शिक्षा से जोड़कर बनाया आत्मनिर्भर

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:30 PM (IST)

गोड्डा की शिक्षिका दर्शना कुमारी पांडेय 'जेन-जी' छात्राओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जिन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर और स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों को शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया है।

गोड्डा की दर्शना पांडेय: शिक्षा की मशाल से बेटियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

गोड्डा की दर्शना पांडेय: शिक्षा की मशाल से बेटियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

HighLights

  1. शिक्षिका दर्शना पांडेय ने छात्राओं को शिक्षा से जोड़ा।

  2. उनके मार्गदर्शन से दर्जनों छात्राएं सफल करियर बना पाईं।

  3. झारखंड सरकार से 'बेस्ट टीचर' अवॉर्ड प्राप्त किया।

विधु विनोद, गोड्डा। नवाचार शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली गोड्डा की टीजीटी शिक्षिका दर्शना कुमारी पांडेय 'जेन-जी' (Gen-Z) छात्राओं के लिए रोल मॉडल हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और स्कूल छोड़ चुकीं छात्राओं को शिक्षा से जोड़ते हुए दर्शना ने दर्जनों छात्राओं को सफलता का मार्ग दिखाया है।

दर्शना की शिक्षा और कुशल मार्गदर्शन से मोनिका कुमारी ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. की डिग्री हासिल की और अभी वह मोहाली (चंडीगढ़) में महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में डिप्टी मैनेजर के पद पर काम कर रही हैं। वहीं, निधि भारती झारखंड पुलिस सेवा में कॉन्स्टेबल बनी हैं।

प्रियंका कुमारी आईटीआई कॉलेज में दाखिला लेकर स्किल डेवलपमेंट ट्रेनर बनी हैं। रानी कुमारी भागलपुर में सरकारी शिक्षिका हैं, जबकि अंजलि कुमारी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में हेड क्लर्क हैं।

फूल कुमारी हेम्ब्रम नर्स बनीं, तो अंकिता साह पोषण सखी बनीं। इनकी सफलता में दर्शना की शिक्षा और उनका मार्गदर्शन प्रमुख वजह है। ऐसी दर्जनों छात्राएं हैं, जो दर्शना को अपना रोल मॉडल मानकर और उनसे प्रभावित होकर अपने जीवन में आगे बढ़ पाई हैं।

शुरुआत में दर्शना ने वंचित बच्चियों को शिक्षा से जोड़ा और उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित किया। अभिभावकों से संवाद कर बच्चियों को आगे की पढ़ाई या रोजगार तक पहुंचाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

81169633

2005 में कस्तूरबा से शुरू हुआ सफर:

अंग्रेजी शिक्षिका के रूप में वर्ष 2005 में दर्शना का चयन गोड्डा में हुआ। कालांतर में उन्होंने महागामा, ठाकुरगंगटी और पोड़ैयाहाट के कस्तूरबा विद्यालयों में अपनी सेवाएं दीं। इन विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर और स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए उन्होंने एक मुहिम चलाई।

अभिभावकों को व्यक्तिगत रूप से समझा-बुझाकर उनकी बच्चियों को विद्यालय में नामांकन के लिए तैयार कराया। महागामा के सुदूर क्षेत्रों में जाकर बच्चियों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करना उनकी दिनचर्या थी। यह क्रम 2005 से 2019 तक चला।

इस दौरान दर्शना ने शिक्षिका और वार्डन के रूप में अपनी दक्षता दिखाई। सैकड़ों बच्चियों को सरकारी नौकरी या अच्छी जगह कार्य करने के लिए तैयार किया, जिसका सुखद परिणाम आज सामने है।

हैदराबाद में किया झारखंड का प्रतिनिधित्व:

विद्यालयी शिक्षा को किताबों और कक्षा की सीमाओं से आगे ले जाने की पहल के तहत हैदराबाद में आयोजित स्कूली शिक्षा की पांच दिवसीय कार्यशाला में दर्शना कुमारी पांडेय ने झारखंड का प्रतिनिधित्व किया।

पिछले वर्ष शिक्षक दिवस पर दर्शना को झारखंड सरकार की ओर से 'बेस्ट टीचर' का अवॉर्ड भी दिया गया। वर्तमान में वह उच्च विद्यालय, तरडीहा (पथरगामा) में कार्यरत हैं।

समाज में बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हों, इस संकल्प के साथ मैंने उन्हें सिर्फ पढ़ाया ही नहीं, अपितु जीवन जीने की कला भी सिखाई है। यह अभियान नारी सशक्तिकरण की मिसाल है। - दर्शना कुमारी पांडेय, शिक्षिका

यह भी पढ़ें- बकरी पालन और जनरल स्टोर से बदली किस्मत, गोड्डा की प्रियंका ने 100 से अधिक महिलाओं को दिखाई आत्मनिर्भरता की राह

यह भी पढ़ें- 30000 के कर्ज से खुली कामयाबी की राह, अब दीदियों को आत्मनिर्भर बना रहीं गोड्डा की ज्योति