गावां : गिरिडीह जिले के गावां प्रखंड अंतर्गत गावां के रहनेवाले मो. इस्तियाक आलम एक पैर से दिव्यांग है, वर्तमान समय में राष्ट्रीय विकलांग संघ का जिला सचिव भी है। उन्होंने राज्यस्तरीय पैरालंपिक खेलकूद के आयोजन में वर्ष 2017 में रामगढ़ एवं वर्ष 2018 में देवघर में आयोजित पैरालंपिक खेलकूद में गोल्ड पदक हासिल किया था। वे जेबलिन थ्रो में प्रथम, शॉटपुट में द्वितीय एवं ह्वीलचेयर रेसिग में तृतीय स्थान हासिल किया था। उस समय रामगढ़ की तत्कालीन उपायुक्त राजेश्वरी द्वारा सम्मानित भी किया गया था। इनके बेहतरीन खेल और अनुशासन के कारण राष्ट्रीय पैरालंपिक प्रतियोगिता में इनका चयन हुआ था। वे राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पैरालंपिक खेलकूद में भी अपनी पहचान बनाई। आज भी लंबे समय से बेबसी और बेरोजगारी की मार झेल रहे पैरालंपिक राष्ट्रीय खिलाड़ी मो. इश्तियाक आलम सिस्टम को भी कोसते हुए कहते हैं कि शिक्षित होने के बावजूद किसी तरह के रोजगार के लिए सरकार की ओर से दिव्यांग होने के बाद भी उन्हें प्राथमिकता नहीं दी गई। आज भी वे सुविधाओं को तरस रहे हैं। उन्होंने मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद तेलंगाना से वर्ष 2019 में एमए किया है, वहीं बिनोबाभावे यूनिवर्सिटी से वर्ष 2014 में बीएड की पढ़ाई भी पूरी कर चुके हैं। साल 2017 में बिहार टेट क्वालिफाइड भी किया है। बताते हैं कि टेट पास करने के बाद लगा था कि सरकार तुरंत रोजगार दे देगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने यहां के स्थानीय नेता व जनप्रतिनिधियों के द्वारा भी उनकी सुध नहीं लेने से निराशा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि सभी बड़ी-बड़ी बातों को मंच के माध्यम से कहते हैं पर हकीकत बिल्कुल अलग है। पैरालंपिक राष्ट्रीय दिव्यांग खिलाड़ी मो. इश्तियाक आलम ने वरीय अधिकारियों से समय पर विकलांग पेंशन की मांग की है। कहा है कि कोरोना वायरस जैसे महामारी में विकलांग पेंशन लाभुकों को प्रत्येक महीना कम से कम समय पर राशि मिलना सुनिश्चित किया जाए, ससमय जिला के सभी दिव्यागों को पेंशन नहीं मिलने पर कड़ा ऐतराज जताया है।

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