संवाद सहयोगी, मधुबन (गिरिडीह) : मुंबई निवासी मनीष मेहता के घर पर दुनिया की सारी सुख सुविधाएं मौजूद लेकिन उनके बेटे हेतभाई को यह भौतिक सुख बेकार लग रहा था। आंख चौंधिया देने वाली हीरे और जवाहरात की चमक उनके बेटे हेतभाई मेहता को आकर्षित नहीं कर सकी। धर्म और आध्याम में सदैव विश्वास रखने वाला हेतभाई ने जब संन्यास दीक्षा की बात अपने स्वजनों को बताई तो लोग नाराज जरूर हुए लेकिन बेटे के हठ के आगे उन्हें झुकना पड़ा। सभी भौतिक सुख और सुविधा सहित गृह त्याग करते हुए हेतभाई शनिवार को जैन के सबसे पवित्र स्थल मधुबन पारसनाथ पहुंचकर जैन दीक्षा ग्रहण कर संन्यास के रास्ते चल पड़े। हीरा कारोबारी मनीष मेहता का पुत्र हेतभाई संन्यास दीक्षा के साथ ही हितांश शेखर महाराज बन गए। साधु संतों के मंगल सानिध्य में धार्मिक विधि विधान से उन्हें दीक्षा दी गई। साधु जीवन में हितांश शेखर ने हेत शेखर विजय जी महाराज को गुरु के रूप में स्वीकार किया। शनिवार सुबह से ही दीक्षा कार्यक्रम की शुरूआत हुई जो देर शाम तक चलती रही। 

आकर्षक वाद्य यंत्र की धुन पर गगनभेदी मंत्रोच्चारण के साथ हेतभाई को दीक्षा प्रदान की गई। इस दौरान साधु संतों की ओर से कई धार्मिक विधियां पूरी की गई। इस दौरान साधु संतों के आज्ञानुसार आकर्षक परिधान त्याग कर तथा केस लोच के बाद वे साधु जीवन की ओर अग्रसर हुए। महोत्सव में आचार्य विजय महानंद सूरीश्वर जी महाराज, सिद्धचंद्र विजय जी महाराज, सिद्धांतचंद्र विजय जी महाराज, अभिषेक विजय जी महाराज, क्षमाशेखर विजय जी महाराज, हेमशेखर विजय जी महाराज, तथा दक्षगुना श्री जी महाराज ससंघ विराजमान थे।

Edited By: Gautam Ojha

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