सरिया (गिरिडीह): बोकारो के अस्पताल से जननायक महेंद्र सिंह की पत्नी शांति देवी का शव पैतृक गांव खंभरा के घर के आंगन में रविवार दोपहर पहुंचने के साथ ही गांव समेत आसपास के सैकड़ों लोग उमड़ पड़े। गांव से आंगन तक मातम पसरा हुआ था। मां का शव देखते ही पुत्र सह विधायक विनोद सिंह की बहनें की रुलाई थम नहीं रही थी। तीनों बहन अपने ससुराल बिरनी, बोकारो से पहुंची थी। विनोद सिंह बहनों को ढांढस बंधा रहे थे। एक बहन बार-बार बेहोश हो जा रही थी। मां पार्थिव शरीर आंगन में लगभग पौने घंटे तक रहा। इस बीच अर्थी की तैयारी पूरी की गई।

लोग कह रहे थे कि महेंद्र सिंह के जीवन पर्यंत उनकी पत्नी शांति देवी कदम-कदम पर साथ देती रहीं। उसके बाद भी परिवार को संभालती रही। भले व पति के साथ सार्वजनिक मंच साझा नहीं करती थी पर परिवार का दायित्व संभालने से लेकर हर सहयोग वे बखूबी करतीं थी। यहां तक कि महेंद्र सिंह की उपस्थिति व अनुपस्थिति में जब कोई फरियादी उनकी चौखट तक पहुंचता था तो चाय व बिस्कुट से आवभगत वहीं करती थी। फिर उनसे कुशलक्षेम जानती थी। लोगों का कहना था कि शांति देवी की यादें वे लंबे समय तक बिसर नहीं पाएंगे।

खंभरा में आयोजित संकल्प सभा के बाद वहीं से तीन सौ गज दूरी घर के आंगन से शांतिदेवी की शवयात्रा जब निकली तो हर लोगों का चेहरा बुझा-बुझा सा था। सैकड़ों की संख्या में लोग खंभरा से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय कर कर नदी स्थित श्मशान घाट तक पहुंचे। शव को कंधा देने में अन्य स्वजनों के साथ पुत्र विनोद आगे थे। तीनों बहनें भी शव यात्रा में शामिल थी। एक बहन बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। वे बदहवासी स्थिति में ही श्मशान घाट तक पहुंची। मुखाग्नि पुत्र विनोद सिंह जब दे रहे थे तब लोग आंखों में आंसू को थामने में लगे थे।

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