दिलीप सिन्हा, हरलाडीह (गिरिडीह): यह पीरटांड़ का घोर नक्सल प्रभावित गांव हरलाडीह है। देश के चोटी के माओवादी लीडर एवं एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा का मदनाडीह गांव इसी हरलाडीह पंचायत का हिस्सा है। चारों ओर पहाड़ एवं जंगलों से घिरा यह गांव गिरिडीह जिला मुख्यालय से करीब 55 किमी. दूर है। यह इलाका कितना संवेदनशील है, इसका अनुमान आप इसी से लगा सकते हैं कि इस पूरे इलाके में 12 मई को मतदान कराने वाले कर्मियों को ईवीएम के साथ प्रशासन ने दो दिन पूर्व शुक्रवार को हेलीकाप्टर से पहुंचाया है। तीन दिन पूर्व से ही पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर सीआरपीएफ के जवान तैनात कर दिए गए हैं। ऐसी चुस्त-दुरूस्त व्यवस्था है कि चुनाव बाधित करना तो दूर की बात है इस इलाके में परिदा भी पर नहीं मार सकेगा।

शुक्रवार को गिरिडीह से जब हम चलें और जैसे ही पीरटांड़ इलाके में प्रवेश किए मुख्य पथ पर जगह-जगह सड़क की दोनों ओर सीआरपीएफ के जवान मुस्तैद थे। यह व्यवस्था हरलाडीह तक थी। शुक्रवार की शाम करीब चार बज रहे हैं। गिरिडीह से हम हरलाडीह उत्क्रमित उच्च विद्यालय पहुंचे हैं। इसी जगह पर सीआरपीएफ कैंप एवं अभी हाल ही में खुले हरलाडीह ओपी है। गिरिडीह के बोड़ो हवाईअड्डा से हेलीकाप्टर से करीब 40 मतदानकर्मियों को यहां पहुंचाया जा चुका है। सीआरपीएफ जवानों की सुरक्षा में सभी मतदानकर्मियों को रखा गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन कर्मियों को कैंप से बाहर जाने की इजाजत नहीं है। न ही बाहर के किसी व्यक्ति से इनकी मुलाकात की इजाजत है। काफी कोशिश के बाद सीआरपीएफ के अधिकारियों ने दो पीठासीन पदाधिकारियों से हमें मिलने की मंजूरी दी। हमारी मुलाकात सबसे पहले जानकी हरिजन से होती है। मीडिया को सामने पाकर वे राहत की सांस लेते हैं। जानकी बोकारो जिले के नावाडीह के भेंडरा पंचायत के निवासी हैं। उत्क्रमित उच्च विद्यालय नगरी डुमरी के वे शिक्षक हैं। उत्क्रमित मध्य विद्यालय पंडरिया टू स्थित मतदान केंद्र के वे पीठासीन पदाधिकारी बनाकर भेजे गए हैं। जीवन में पहली बार हवाई यात्रा का सुख उन्हें आज मिला है। वैसे वे इस सुख से बहुत रोमांचित नहीं हैं। उनका कहना है कि रोमांच से अधिक उन्हें डर लग रहा था। बोड़ो हवाई अड्डा से जब हेलीकाप्टर ने उड़ान भरा और जब कई बार ऊपर-नीचे हुआ तो ये काफी डर गए थे। इनकी पीड़ा यह थी कि उन्हें ऐसे समय में यहां ड्यूटी पर लगाया गया जब उनकी बेटी अस्पताल में है। इसके बावजूद वे इस दुर्गम इलाके में चुनाव कराने से पीछे नहीं हटे हैं।

चुनाव ने पूरा कराया हेलीकाप्टर की सवारी का सपना: राजधनवार थाना क्षेत्र के नावागढ़चट्टी निवासी बालगोविद नायक बिरनी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय चानो के शिक्षक हैं। वे यहां जमदाहा मतदान केंद्र के पीठासीन पदाधिकारी बनकर आए हैं। हेलीकाप्टर से यहां चुनाव कराने आए बालगोविद बेखौफ हैं। वे कहते हैं कि सरकार ने चुनाव कराने भेजा है तो चुनाव कराकर जाएंगे। कोई खौफ नहीं है। हेलीकाप्टर की सवारी पर कहा कि पहली बार हवाई यात्रा करने का सौभाग्य मिला है। बेहद रोमांचक यात्रा रही। अपने पैसे से हवाई जहाज से यात्रा तो कर सकते हैं लेकिन हेलीकाप्टर की यात्रा संभव नहीं थी। यह चुनाव के कारण ही संभव हो सका है। उनके घर से परिवार के लोग बराबर फोन कर रहे हैं। सभी को कह दिया है कि बहुत आराम से पहुंच गए हैं। चिता की कोई बात नहीं है।

बेटी अस्पताल में और पति दुर्गम स्थान में: बेबी देवी के पति जानकी हरिजन हरलाडीह में हेलीकाप्टर से चुनाव कराने गए हैं। इधर उनकी 15 साल की बेटी प्रिया कुमारी रंजन काफी बीमार हैं। वह धनबाद के कतरास स्थित उमाशंकर क्लीनिक में भर्ती हैं। एक साथ दोहरी परेशानी आने से बेबी देवी को समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे। अस्पताल में बेटी के इलाज में भागदौड़ कर रहीं बेबी देवी ने बताया कि उन्हें दोहरी चिता सता रही है। एक तरफ बेटी की तबीयत ठीक नहीं है और दूसरी तरफ उनके पति घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में मतदान कराने गए हैं। जैसे ही पता चला कि उन्हें हेलीकाप्टर से ले जाया जा रहा है, तो क्षेत्र कितना खतरनाक होगा, यह समझ में आ गया। भगवान का शुक्र है कि मोबाइल से उनसे संपर्क हो रहा है। भगवान मेरी बेटी को भी जल्दी स्वस्थ कर दे और पति भी सकुशल लौट आएं।

Posted By: Jagran

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