गिरिडीह : कोविड-19 रूपी वैश्विक महामारी के संकट के इस दौर में गिरिडीह कोर्ट नए प्रारूप में कार्य कर अपनी पहचान बनाई है। हाई कोर्ट के निर्देश पर चिह्नित मामलों की सुनवाई की जा रही है। कोविड-19 से सुरक्षित रहकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के निर्धारित मानकों का अनुपालन करते हुए न्यायिक कार्यों का प्रतिदिन निष्पादन किया जा रहा है। लॉकडाउन के दौरान गिरिडीह में कोर्ट में कुल 695 मामलों का निष्पादन किया गया। इसमें हत्या, डकैती, दुष्कर्म, आर्थिक अपराध के भी मामले बड़ी संख्या में है। दीवानी एवं परिवार न्यायालय के भी मामलों का निष्पादन किया गया है। वहीं प्रतिदिन लगभग 35-40 मामलों की फाइलिग हो रही है। नकल खाना से प्रतिदिन लगभग 55 मामलों में सत्यापित प्रतिलिपि तैयार की जा रही है। इस प्रक्रिया में न्यायालय कर्मी तथा न्यायिक पदाधिकारी सुरक्षित रहते हुए अपने न्यायिक कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं।

नए नियम से बंदियों की हो रही है रिमांड: व्यवहार न्यायालय में नए बंदियों की रिमांड करने के लिए प्रधान जिला जज दीपकनाथ तिवारी एवं सत्र न्यायाधीश ने दिशा निर्देश जारी किए हैं। बंदियों की रिमांड करते वक्त उसे न्यायालय हाजत में रखा जाता है। जहां हाजत प्रभारी बंदी के चिह्नितीकरण का प्रमाण पत्र समर्पित करते हैं उसी बंदी को हाजत में रखा गया है। इसके बाद संबंधित न्यायालय द्वारा उक्त बंदी की रिमांड बिना उनसे सीधे संपर्क में आए सतर्कतापूर्वक की जाती है। इस वजह से अभी तक गिरिडीह न्याय मंडल और सेंट्रल जेल में इस प्रकार के किसी भी मामले के पाए जाने की कोई सूचना नहीं है। वहीं जमानत आवेदन की सुनवाई तथा बेलबांड की जांच भी बिना पक्षकारों के सीधे संपर्क में आए हुए की जा रही है।

राजमहल जेल में कोरोना संक्रमण मिलने के बाद मचा हड़कंप राजमहल के उप मंडल कारा में एक कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज मिलने से पूरे राज्य के जेलों में हड़कंप की स्थिति मची है। गिरिडीह न्यायमंडल पूरी तरह सचेत है। इसके लिए काफी संवेदनशीलता तथा सतर्कता बरती जा रही है। व्यवहार न्यायालय गिरिडीह में प्रतिदिन सभी न्यायिक पदाधिकारियों के चेंबर, न्यायालय परिसर और कार्यालय को निरंतर सैनिटाइज्ड किया जा रहा है। पीडीजे दीपक नाथ तिवारी, सीजेएम मिथिलेश कुमार सिंह, एसीजेएम मनोरंजन कुमार और डालसा के सचिव संदीप कुमार बर्तम ने पिछले दिनों सेंट्रल जेल का निरीक्षण किया था। वहां संचालित क्वारंटाइन सेंटर और आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था को उन्होंने देखा तथा जेल अधीक्षक को निर्देश दिया। कोई भी बंदी जो संदिग्ध प्रतीत होता है उसे कम से कम 14 दिनों तक के लिए इस वार्ड में रखने के बाद ही सामान्य वार्ड में भेजा जाए। साथ ही उचित चिकित्सीय सुविधा सभी बंदियों को नियमित तौर पर प्रदान की जाए। नए बंदी को पहले चौदह दिनों के लिए क्वारंटाइन सेंटर में रखें तथा पुन: उसका मेडिकल परीक्षण कराके ही वार्ड में रखें।

-व्यवहार न्यायालय गिरिडीह के न्यायिक पदाधिकारियों तथा न्यायिक कर्मियों की न्यायालय के मुख्य द्वार पर ही थर्मल स्कैनिग तथा हैंड सैनिटाइज कर न्यायालय में प्रवेश कराया जाता है। सभी के बीच निश्शुल्क मास्क का वितरण भी किया गया है। न्यायालय परिसर तथा न्यायिक पदाधिकारियों के आवास को भी नियमित तौर पर सैनिटाइज्ड किया जाता है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा स्वयं के स्तर पर इन सभी चीजों की मॉनीटरिग की जाती है।

Posted By: Jagran

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