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19 अगस्त को मोक्ष सप्तमी, सम्मेद शिखरजी में हजारों श्रद्धालु करेंगे पारसनाथ पर्वत की वंदना

Published: Tue, 18 Aug 2026 07:52 PM (IST)

Parasnath, Giridih News:सम्मेद शिखरजी में मोक्ष सप्तमी पर देश भर से जैन श्रद्धालु जुटेंगे, जहां भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण महोत्सव पर 2300 किलो का विशाल निर्वाण लड्डू चढ़ाया जाएगा।

गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़। (फाइल फोटो)

गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. भगवान पार्श्वनाथ को 2300 किलो का विशाल निर्वाण लड्डू अर्पित होगा।

  2. यह आयोजन गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।

  3. मोक्ष सप्तमी पर देश भर से जैन श्रद्धालु सम्मेद शिखरजी में जुटे।

प्रमोद चौधरी, गिरिडीह। जैन परंपरा में श्रावण शुक्ल सप्तमी का विशेष धार्मिक महत्व है। जैन धर्म के चौबीस में से बीस तीर्थंकर की निर्वाण भूमि सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी, मधुबन में 19 अगस्त को भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण महोत्सव यानी मोक्ष सप्तमी पर देश भर के जैन श्रद्धालुओं का जुटान होगा।

इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु पारसनाथ पर्वत की वंदना कर भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण स्थल स्वर्णभ्रद टोंक (शिखरजी पर स्थित) पर निर्वाण लड्डू चढ़ाएंंगे। सावन सप्तमी के दिन ही जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ निर्वाण प्राप्त किए थे।

चातुर्मास के बीच मोक्ष सप्तमी को लेकर मधुबन में जगह-जगह पूजा-आराधना, धार्मिक अनुष्ठान होंगे। धर्मशालाओं में कमरों की बुकिंग भी श्रद्धालु कर चुके हैं। 

पर्वतारोहण नहीं, निर्वाण का स्मरण करने वाली आध्यात्मिक साधना

मोक्ष सप्तमी पर श्रद्धालु पारसनाथ पर्वत की कठिन व धार्मिक यात्रा करते हैं। पर्वत की चोटी पर स्थित भगवान पार्श्वनाथ टोंक का विशेष महत्व है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान पार्श्वनाथ की आराधना करते हैं और निर्वाण लड्डू अर्पित करते हैं।

तीर्थयात्रियों के लिए शिखरजी की यात्रा केवल पर्वतारोहण नहीं, बल्कि श्रद्धा, तप, संयम और तीर्थंकरों के निर्वाण का स्मरण करने वाली आध्यात्मिक साधना भी मानी जाती है।

दिगंबर और श्वेतांबर परंपरा में अलग-अलग तिथि

संतों के मुताबिक भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण कल्याणक को लेकर दिगंबर और श्वेतांबर जैन परंपराओं में तिथि का अंतर भी है। दिगंबर परंपरा में श्रावण शुक्ल सप्तमी को भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक मनाया जाता है, जबकि श्वेतांबर परंपरा में श्रावण शुक्ल अष्टमी को यह अवसर मनाने की परंपरा है। इस कारण दोनों परंपराओं में पर्व की तिथि अलग-अलग होती है।

शिखरजी के पैदल मार्ग की सफाई तेज

मोक्ष सप्तमी को लेकर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ के मद्देनजर शिखरजी स्वच्छता समिति ने भी सफाई पर विशेष ध्यान दिया है। समिति से जुड़े कर्मियों और स्वयंसेवकों की ओर से पारसनाथ पर्वत जाने वाले पैदल तीर्थ मार्ग की सफाई मंगलवार शाम तक होती रही।

इस धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पारसनाथ पर्वत की पैदल यात्रा करते हैं। ऐसे में तीर्थ मार्ग की स्वच्छता और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर वातावरण बनाए रखना तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दो दिन पहले से बढ़ी चहल-पहल

कमरों की अग्रिम बुकिंग बढ़ने के साथ ही मधुबन में मोक्ष सप्तमी को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है। धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं के ठहरने की बेहतर व्यवस्थाएं संस्थाएं की है। --कहां कहां से आते हैं तीर्थयात्री : मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों से लोग यहां पहुंचते है।

 

भगवान पार्श्वनाथ की आराधना केवल पूजा और भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन से समता, आत्मज्ञान, संयम, सहजता, शांति और निर्भयता ग्रहण करना ही आराधना का वास्तविक अर्थ है। भगवान पार्श्वनाथ के जीवन में लगातार दस भवों तक उपसर्ग और संकट आए, लेकिन वे कभी विचलित नहीं हुए।उनके पास समता का बल और आत्मज्ञान की शक्ति थी। वे जानते थे कि आत्मा शाश्वत,अजर-अमर और अविनाशी है,जबकि शरीर और संसार की समस्त वस्तुएं संयोग मात्र हैं। उनके जीवन को देखें तो उनके सामने हमसे कहीं अधिक कठिन संकट आए पर, कभी किसी से शिकायत नहीं की, बल्कि समता से सहते रहे। पार्श्वनाथ भगवान का सच्चा भक्त संकटों से भागने वाला नहीं, बल्कि उन्हें समता और धैर्य से सहने वाला होना चाहिए।

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मुनि प्रमाण सागर जी महाराज।