गिरिडीह, अंजनी सिन्हा। भाकपा माओवादी के बिहार-झारखंड सीमांचल जोनल एरिया कमेटी के सदस्य दरोगी यादव का आठ साल का बेटा तिलैया सैनिक स्कूल में पढ़ता है, वह भी लेवी की रकम से। भेलवाघाटी से गिरफ्तार किए गए दरोगी यादव के पुत्र के बारे में पुलिस ने गिरिडीह कोर्ट में इस संबंध में दस्तावेज जमा किया है। दरोगी यादव को मंगलवार को जेल भेज दिया गया। दरोगी यादव बिहार के चकाई का रहने वाला है।

भाकपा माओवादी में उसका कार्य क्षेत्र गिरिडीह, जमुई, मुंगेर और नवादा रहा है। दरअसल, दरोगी यादव को सीआरपीएफ के साथ मिलकर गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने दो दिन तक रिमांड पर रखा। पूछताछ के दौरान दरोगी यादव ने कई राज खोले। उसने बताया कि बेटे को अच्छी तालीम दिलाने के लिए तिलैया सैनिक स्कूल में दाखिला कराया है। पुत्र की पढ़ाई का सारा खर्च कोडरमा का ठेकेदार जगदीश पंडित वहन करते हैं। ठेकेदार से लेवी की रकम ली जाती है। वही स्कूल में जाती है।

जमीन का विवाद नहीं सुलझने पर बन गया था माओवादी

दरोगी यादव ने पुलिस को बताया कि जमीन के विवाद में वह जेल गया था। जमीन के विवाद का समाधान नहीं हुआ तो 2011 में वह माओवादी बन गया था। सिधू कोड़ा और सुरंग के साथ उसके रिश्ते बेहतर होते गए। कई बार पुलिस के साथ मुठभेड़ हो चुकी है। मुखिया पुत्र की हत्या में उसका हाथ रहा है। सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट हीरा झा की हत्या में शामिल रहा है।

बरमसिया, लकड़ा, काजीमोह, दुधन में लगती जन अदालत

दरोगी यादव ने पुलिस को बताया कि भाकपा माओवादी की जन अदालत बरमसिया, लकड़ा, काजीमोह व दूधन में लगाई जाती रही है। कजरा बरमसिया के चोरमरा जंगल में संगठन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन इलाकों को सुरक्षित माना जाता है। बताया कि वह दनिया, कोयाकोल, रानी गदर, बासोडीह, लोकाये और भेलवाघाटी में सक्रिय रहता है। उसने बताया कि संगठन को चलाने के लिए कई लोगों से लेवी ली जाती है। खैरा के बीड़ी पत्ता कारोबारी राजकुमार साव, नवादा के मोहलीटांड के बीड़ी पत्ता व्यापारी बसंत साव, चरका के ठेकेदार नरेश यादव, गावां के ढिबरा कारोबारी मंटू साव समेत कई लोग लेवी देते हैं। लेवी का पैसा सिधू कोड़ा और बुधू माझी वसूलते हैं। रकम अरविंद यादव और पिंटू राणा के पास रहती है।

पारसनाथ पहाड़ी के सुरक्षित इलाके का कई बार किया दौरा

दरोगी यादव ने पुलिस को बताया कि पारसनाथ की पहाड़ी के सुरक्षित इलाके का कई बार दौरा कर चुका है। नक्सली कमांडर चिराग दा की मौत के बाद वह मधुबन के मोहनपुर आया था। वहां प्रकाश माझी से मुलाकात हुई थी। 2011 से लेकर 2018 तक पारसनाथ में कई बार गया है। हिंदी और खोरठा जानने वाले दरोगी यादव ने परवेज उर्फ अनुज, अर्जुन कोड़ा, बालेश्वर कोड़ा, सोमर राणा, डॉक्टर सोरेन कोड़ा, राजेश संथाल, रेणुका कोड़ा, बीरेंद्र कोड़ा, सोमर कोड़ा, अनिता, सिधु कोड़ा, मूर्ति राणा, पतलू तुरी, सहदेव संथाल, अरविंद यादव और रावण कोड़ा को सहयोगी बताया।  

Posted By: Sachin Mishra

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