गिरिडीह, जेएनएन। तालिबान के आतंकियों की कैद से मुक्त होने के बाद काली महतो अपने घर लाैट आया है। काली के लाैटने का परिवार और गांव के लोगों को डेढ़ साल से इंतजार था। मंगलवार की देर रात काली अपनी पत्नी और पुत्र चिंतामन महतो के सात हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड के बेड़म गांव में पहुंचा तो जोरदार स्वागत हुआ।

अमेरिका और तालिबान के बीच समझाते के बाद 6 अक्टूबर को काली महतो समेत तीन भारतीय बंधकों को तालिबानी आतंकियों ने छोड़ दिया था। इसके बाद दिल्ली पहुंचने पर काली की पहचान के लिए उसकी पत्नी व पुत्र दिल्ली को बुलाया गया था। काली महतो के सकुशल घर लौटने पर पूरे गांव में जश्न का माहौल है। प्रवासी मजदूरों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली बुधवार की सुबह काली महतो के घर जाकर मिले और सकुशल घर लौटने पर स्वागत किया।

काली महतो ने मोबाइल पर दैनिक जागरण को बताया कि तालिबान ने अगवा किए गए सात भारतीय समेत आठ लोगों में से किसी को भी शारीरिक यातनाएं नहीं दी थी। अपने बंदूकधारियों को हिदायत दी थी कि अगवा लोगों की धार्मिक आस्था पर चोट नहीं पहुंचाई जाए। खाने-पीने की सारी सुविधाएं दी गई थी। सिर्फ दाढ़ी और बाल कटवाने की इजाजत नहीं थी। इस कारण सभी के दाढ़ी व बाल बढ़ गए थे। उनका कहना था कि उनकी लड़ाई अफगानिस्तान एवं अमेरिका सरकार से है। आपलोगों से कोई दुश्मनी नहीं है। सरकार से अपने लोगों को छुड़ाने के लिए आपलोगों को अगवा किया है। काली ने बताया कि बगोदर के हुलास महतो, प्रसादी महतो समेत अगवा बाकी चार मजदूर भी सकुशल हैं। इनकी भी जल्द रिहाई हो जाएगी।

विदित हो कि अफगानिस्तान के बाघलान प्रांत से 6 मई 2018 को भारतीय कंपनी केईसी इंटरनेशनल में ड्यूटी जाने के दौरान दो इंजीनियर समेत सात भारतीय मजदूर एवं एक अफगानी चालक को तालिबान ने अगवा कर लिया था। अगवा भारतीय मजदूरों में से सबसे पहले बगोदर के प्रकाश महतो को 17 मार्च 2019 को रिहा किया था। अभी कुछ दिन पूर्व काली महतो एवं केरल के दो इंजीनियर को रिहा किया गया है।

Posted By: Mritunjay

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