जागरण संवाददाता, गिरिडीह: सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी की मौत के मामले में सोमवार को डालसा सचिव के नेतृत्व में टीम ने जांच की। प्रधान जिला जज सह डालसा के अध्यक्ष राजेश कुमार वैश्य के आदेश पर एक जांच टीम का गठन डालसा सचिव के नेतृत्व में किया गया।

इस दौरान बंदियों ने शिकायत पेटी में पत्र डालकर बताया कि सिपाही उनके साथ मारपीट करते हैं। बंदियों को कारापाल से मिलने नहीं दिया जाता है। वार्डन सोने देने के बदले नए बंदी से हजारों रुपए की मांग करते हैं। साथ ही बंदी से मिलने आए परिजनों से मुलाकात के दौरान मेन गेट पर मोटी रकम ली जाती है।

टीम में न्यायाधीश प्रभारी रंजय कुमार एवं जेल के पैनल अधिवक्ता एके सिन्हा समेत अन्य लोग शामिल थे। टीम ने बंदी मनीष कुमार के फांसी लगाए गए स्थान का निरीक्षण किया। साथ ही उसे आवंटित वार्ड का भी निरीक्षण किया। मृत बंदी के वार्ड में रहने वाले अन्य बंदियों से उसके बारे में पूछताछ की गई। टीम ने घटना स्थल का विस्तृत मुआयना कर प्रतिवेदन तैयार किया, जिसे प्रधान जिला जज के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान कारा अधीक्षक नारायण विज्ञान प्रभाकर, कारापाल कालेश्वर राम पासवान एवं चिकित्सक डॉ. आरपी दास समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

बंदियों ने सिपाही और वार्डन पर लगाया पैसे लेने का आरोप: जांच के क्रम में बंदियों ने जेल में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने और गाली देने का आरोप लगाया। साथ ही वार्डन पर पैसे नहीं देने पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। इन आरोपों पर डालसा के सचिव ने जेल अधीक्षक को त्वरित समाधान करने का निर्देश दिया। सभी सुरक्षा कर्मियों और वार्डन को बुलाकर डालसा के सचिव और रजिस्ट्रार ने चेतावनी देते हुए कड़ी फटकार लगाई। कहा कि भ्रष्टाचार और लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डालसा के सचिव ने जेल अधीक्षक को कहा कि इस मामले को गंभीरता से लें, ताकि शिकायत की पुनरावृत्ति नहीं हो।

Posted By: Jagran

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