बिरनी (गिरिडीह): अरारी निवासी मनोज पंडित की पांच वर्षीय पुत्री नीलम कुमारी की मौत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरनी में शनिवार रात करीब आठ बजे हो गयी। परिजन जब नीलम को लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं था। बच्ची को लेकर जब वे डॉक्टर के आवास गए तो वहां भी उसका इलाज नहीं किया गया। इस क्रम में उसने दम तोड़ दिया। मनोज पंडित एवं उनके भाई कार्तिक पंडित ने आरोप लगाया है कि चिकित्सक की लापरवाही के कारण नीलम की मौत हुई है। यहां मरीज का इलाज करने के लिए कोई चिकित्सक नहीं है और न तो कोई बताने वाला है कि बच्ची की मौत हो गई है या नहीं।

नीलम के पिता ने बताया कि बेटी दो दिन से बीमार थी। स्थानीय चिकित्सक से इलाज कराया गया था। अचानक शनिवार शाम को उसकी तबीयत अधिक बिगड़ गई। शाम लगभग साढ़े सात बजे उसे बेहोशी की हालत में इलाज के लिए बिरनी सरकारी अस्पताल ले कर आए। अस्पताल में एक भी चिकित्सक नहीं थे। उपस्थित कर्मी राजेंद्र पासवान ने बताया कि डॉ. ताजउद्दीन अपने सरकारी आवास में हैं। बच्ची को वहीं जाकर दिखा लें। जब डॉ. ताजउद्दीन के आवास पर बच्ची को लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने देखने से मना कर दिया और फटकार कर आवास से भगा दिया। बीमार बच्ची को परिजन ने अस्पताल बेड में रख कर इलाज करने के लिए चिकित्सक के आने का इंतजार करते रहे लेकिन चिकित्सक नहीं पहुंचे। काफी देर बाद बच्ची ने दम तोड़ दी। मृतका के परिजन ने घटना की सूचना स्थानीय पूर्व मुखिया रामू बैठा को दी। पूर्व मुखिया अस्पताल पहुंचकर घटना की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने घटना की जानकारी बीडीओ संदीप मधेशिया, सिविल सर्जन एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दी। सिविल सर्जन ने मृतका के परिजन से बात कर मामले की जानकारी ली। साथ ही दोषी चिकित्सक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही। इसके बाद परिजन रात करीब नौ बजे शव को लेकर घर चले गए। पूर्व मुखिया बैठा ने कहा है कि चिकित्सक के लापरवाही के कारण बच्ची की मौत हुई है, अगर समय पर चिकित्सक बच्ची को देख कर इलाज शुरू कर देते तो शायद उसकी जान बच जाती। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राकेश रंजन सिंह ने बताया कि गिरिडीह किसी काम से आए हुए हैं। अस्पताल में जो चिकित्सक थे उन्हें देखना चाहिए था कि बच्ची की क्या हालत है। चिकित्सक ने इलाज नहीं किया तो उसने गलत किया है। मामले की जांच करेंगे।

Posted By: Jagran

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