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गिरिडीह में 45 दिन की गैस बुकिंग बाध्यता से ग्रामीण परेशान, चूल्हे पर लौटी लकड़ी-कोयले की आग

Published: Tue, 01 Sep 2026 07:32 PM (IST)

LPG Booking Rule: गिरिडीह के ग्रामीण उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की दोबारा बुकिंग के लिए 45 दिन के अंतर से परेशानी हो रही है।

LPG रिफिल बुकिंग के बीच 45 दिनों के अंतर से ग्रामीण परेशान। (प्रतीकात्मक फोटो)

LPG रिफिल बुकिंग के बीच 45 दिनों के अंतर से ग्रामीण परेशान। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. गिरिडीह में 45 दिन के गैस बुकिंग अंतर से बढ़ी परेशानी।

  2. ग्रामीण परिवारों को समय से पहले सिलेंडर खत्म होने की दिक्कत।

  3. खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयले का उपयोग करने को मजबूर।

संवाद सहयोगी, हीरोडीह (गिरिडीह)। इरान-अमेरिया युद्ध के मद्देनजर ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की दोबारा बुकिंग के लिए 45 दिन का अंतर निर्धारित किए जाने से गिरिडीह के उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। कई परिवारों का घरेलू गैस सिलेंडर 45 दिन पूरे होने से पहले ही खत्म हो जा रहा है।

ऐसे में उन्हें खाना पकाने के लिए दोबारा लकड़ी, कोयला या अन्य वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में संयुक्त परिवारों और अधिक सदस्यों वाले घरों में एक सिलेंडर 45 दिनों तक चलाना विशेष रूप से मुश्किल हो रहा है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की खपत परिवार के आकार और खाना पकाने की जरूरत के अनुसार अलग-अलग होती है। ऐसे में सभी के लिए एक समान 45 दिन का अंतर परेशानी बढ़ा रहा है।

ग्रामीण महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि जरूरत के अनुसार रिफिल बुकिंग की सुविधा दी जाए, ताकि सिलेंडर खत्म होने के बाद उन्हें वैकल्पिक ईंधन पर निर्भर न रहना पड़े।

गैस एजेंसी संचालक के अनुसार पहले सिलेंडरों की कमी नहीं थी। जो अब पहले की अपेक्षा काफी घट चुकी है।
गृहणी सोनी देवी कहती हैं कि एलपीजी प्रत्येक घर की सामान्य जरूरत है। इसकी कमी के बाद जो परेशानी होती है, उसे बयां करना भी मुश्किल होता है। सरकार को इस पर यथाशीघ्र सार्थक पहल करनी चाहिए।

गृहिणी रीता देवी कहती हैं कि स्वजन की जरूरत के हिसाब से गैस की खपत अलग-अलग होती है। 45 दिनों की बाध्यता सभी परिवारों पर एक समान लागू करना व्यावहारिक नहीं है। ग्रामीण रंजीत कुमार कहते हैं कि गैस रीफिलिंग की अवधि 45 दिन होने के कारण लोगों को पुनः पुरानी व्यवस्था की ओर जाना मजबूरी बन गई है।

युवा समाजसेवी कपिल वर्मा ने सरकार से व्यवस्था में तत्काल बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने से कोयला लकड़ी के धुएं से मुक्ति पर सवालिया निशान लग गया है।