गिरिडीह : 80 लाख रुपये की ठगी के शिकार हुए उद्योगपति निर्मल झुनझुनवाला की दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे एक्सपो में लंदन की पामेला नामक महिला से फरवरी 2019 में मुलाकात हुई थी। पामेला से संपर्क में आने के बाद व्यवसाय को और भी बेहतर बनाने के चक्कर में वे उलझते गए और अंतत: ठगी के शिकार हो बैठे। एक्सपो में भेंट होने के बाद पामेला ने सुनियोजित तरीके से झुनझुनवाला को जाल में फंसाया।

पामेला ने बताया कि लंदन की लीवर पुल फ्लीजपो हेल्थ केयर नामक कंपनी दवा बनाती है की वह परचेज मैनेजर है। वह कंपनी जो दवा बनाती है वह कैंसर, हृदयरोग और मधुमेह जैसी बीमारियों में उपयोग की जाती है। उसी दवा को बनाने में प्रयुक्त होनेवाले हर्बल केमिकल के बारे में उसने बताया। इसी हर्बल की खरीदारी को लेकर वह साल में तीन-चार बार भारत आती थीं। इसी सिलसिले में दोनों में दिल्ली एक्सपो में बातचीत हुई और मेल आईडी तथा मोबाइल नंबर का आदान-प्रदान हुआ। पामेला ने सितंबर में पर्चेज मैनेजर से हटाने की बात कहते हुए डॉ. एलेक्स डेविड को नया मैनेजर बनाने की बात बताई। यह भी बताया कि कंपनी को यह मैटेरियल वे कहां से लाकर देती हैं इसकी जानकारी कंपनी को नहीं है।

कंपनी भी मैटेरियल लानेवाले स्थान के बारे में जानकारी हासिल करने को दबाव उस पर बनाती रहती है। जो पहले काम करते थे वे दुर्घटना में जख्मी हो गए हैं। तबीयत खराब रहती है और काम करने की स्थिति में वे नहीं हैं। इसकी मैटेरियल काफी महंगी आती है। अगर साथ में काम करना चाहें तो कर सकते हैं। इसके बाद मुनाफे में आधे-आधे की हिस्सेदारी पर दोनों राजी हो गए। इसके बाद ईमेल आईडी व दूसरा मोबाइल नंबर लिया गया। कुछ दिन बाद यूनाइटेड किगडम के नंबर से बात की गई। ईमेल आईडी पर मैटेरियल का कोटेशन लिया गया। साथ ही बताया गया कि यह सुनीता जोंस की कंपनी है। कंपनी का वेबसाइट ऐसा बनाया गया था कि किसी को भी कोई शक नहीं हो सकता था। इसी वेबसाइट को खोलकर देखा गया और कंपनी के बारे में पूरी जानकारी हासिल करते हुए रांची में डेविड से मिलने की बात कही गई। फोन पर सूचना दी गई कि पांच नवंबर को एलेक्स डेविड रांची निकलने वाले हैं। वहीं मुलाकात कर सैंपल देना था। पामेला ने मुंबई की सुनीता जोंस से संपर्क करने कहा। सुनीता से मोबाइल पर झुनझुनवाला की बात हुई। दो लीटर केमिकल के लिए 3.44 लाख रुपये का भुगतान उसके बताए खाते में करने के बाद केमिकल भेज दिया गया। सात नवंबर को डेविड के रांची पहुंचने की जानकारी दी गई। सात नवंबर को एलेक्स डेविड रांची पहुंचा। उसे वहां से रिसीव कर वे होटल ले गए। वहां साथ खाना खाने के बाद वह दो अलग-अलग शीशी में पांच से दस एमएल केमिकल लेकर ब्रिटिश एंबेसी में इसकी जांच कराने की बात कहकर वहां से चला गया। दूसरे दिन करीब 12 बजे उसका फोन आया कि सैंपल एकदम ओके है। इसके बाद 300 लीटर का ऑर्डर आने की बात कही गई। इसके लिए प्लांट दिखाने या कम से कम डेढ सौ लीटर का स्टॉक दिखाने को कहा गया। इस संबंध में जब सुनीता से बात की गई तो सुनीता ने बताया कि फैक्ट्री किसी को भी नहीं दिखाई जा सकती है। उसने डेढ सौ लीटर मैटेरियल की कीमत साढ़े तीन करोड़ बताते हुए जमानत राशि के लिए 80 लाख रुपये जमा करने की बात कही। इसी बीच 11 से 14 नवंबर के बीच अपने तीन खातों से झुनझुनवाला ने 80 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। राशि भुगतान करने के बाद मैटेरियल लेने के लिए 16 नवंबर को कोलकाता बुलाया गया। तय हुआ था कि डेढ़ सौ लीटर केमिकल लेकर सुनीता कोलकाता पहुंचेगी। केमिकल लेने झुनझुनवाला कोलकाता पहुंच गए। कोलकाता जाने के बाद मुंबई से फोन पर सूचना दी कि कूरियर से मैटेरियल भेज दिया गया है। इसमें करीब चार दिन लगना था। झुनझुनवाला कोलकाता में ही रूक गए। इसके बाद कूरियरवाले से पांच कार्टून में मैटेरियल आने की जानकारी मिली। इसी बात को लेकर धीरे-धीरे शंका होने लगी। तब सुनीता जोंस को फोन कर मैटेरियल के बारे में जानकारी ली। उसने अस्सी लीटर मैटेरियल भेजने की बात बताई। कहा कि 150 लीटर के लिए और राशि भेजनी होगी। राशि हस्तांतरण करने की बात कहने पर शंका और पुख्ता हो गई लेकिन अस्सी लाख रुपये दे चुकने के बाद उसे छोड़ते नहीं बन रहा था। इसके बाद इस घटना की पूरी जानकारी फोन पर ही कोलकाता से गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार झा को उन्होंने दी। साथ ही ठगी करनेवालों को अपनी चंगुल में फंसाए रखने को बैंक से तीन बार में दस लाख रुपये, 23 लाख रुपये व 13 लाख रुपये ट्रांसफर करने की जानकारी दी। हालांकि उन्होंने यह राशि ट्रांसफर नहीं की थी। अंतिम बार 27 नवंबर को फोन कर पैसा बैंक खाते के माध्यम से ट्रांसफर करने की झूठी बात करते हुए उनलोगों को अपनी बातों में फंसाए रखा। इसके बाद 30 नवंबर को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।

Posted By: Jagran

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