खोरीमहुआ (गिरिडीह) : धनवार थाना क्षेत्र के कारुडीह गांव में सोमवार शाम चार बजे को शराब विक्रेता और स्थानीय पुलिस के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश तब भड़क उठा जब गांव में शराब बेचने से मना करने शराब विक्रेता के घर गए स्थानीय मुखिया शंकर पासवान तथा वार्ड सदस्य बबलू दास पर शराब विक्रेता ने ंईंट पत्थर से हमला कर दिया। हमले के बाद आक्रोशित ग्रामीण शराब विक्रेता की गिरफ्तारी पर अड़ गए।

स्थिति तब और भड़क उठी जब ग्रामीणों के बुलावे पर शराब विक्रेता को बिना गिरफ्तार किए और सिर्फ सुरेश दास व तुलसी दास के घर की तलाशी लेकर एएसआई पियूष केरकेटा वापस लौटने लगे। बिना कार्रवाई के पुलिस के वापस लौटने पर ग्रामीणों ने पुलिस वाहन को रोक दिया और सड़क पर लेट गए। इस बात पर पुलिस ने आरोपित के घर से एक बूंद शराब भी बरामद नहीं होने का हवाला देकर शक्ति दिखाई तो ग्रामीणों ने शराब विक्रेताओं को संरक्षण देने का आरोप लगा धनवार पुलिस हाय हाय और मुर्दाबाद के नारे लगाए। ग्रामीणों ने प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस के अलावा डीसी और एसपी तक से इसकी शिकायत की गई है। बावजूद अबतक शराब विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति की गई है। हालांकि बाद में जब इसकी जानकारी धनवार थाना प्रभारी रूपेश कुमार सिंह को हुई तो उन्होंने एसआई मुकेश दयाल सिंह, प्रियंका कुमारी, विशाल कुमार, सतेंद्र पासवान एवं कोरोना को लेकर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एसआई रामजी प्रसाद गुप्ता के साथ घटनास्थल पर पहुंच जुटी भीड़ को खदेड़ा व घटना की पूरी जानकारी ली।

रविवार रात में दो ग्रामीणों के बीच शराब के नशे में हुई तू-तू,मैं-मैं को लेकर मुखिया के नेतृत्व में ग्रामीण सुलह समझौता के लिए बैठे थे। इसी क्रम में बात आई कि आए दिन शराब के कारण गांव में कलह होता रहता है। गांव में शराब की बिक्री होने से कोरोना बंदी के बावजूद यहां कई गांव के लोग शराब पीने आते हैं। इससे माहौल तो खराब हो ही रहा है, संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। लोगों ने मुखिया से शराब विक्रेता से बात करने तथा शराब की बिक्री बंद करने का अनुरोध किया। मुखिया शंकर पासवान कुछ ग्रामीणों के साथ शराब विक्रेता सुरेश दास के घर के पास पहुंच पूछताछ करने लगे। इसी बीच बात बिगड़ गई। मुखिया व ग्रामीणों का आरोप है कि सुरेश के परिजनों ने गाली-गलौज करते हुए मुखिया व वार्ड सदस्य पर पत्थर चला दिया। हमले की सूचना से ग्रामीण उग्र हो गए। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। एएसआई पियूष केरकेट्टा दाल-बल के साथ गांव में पहुंच सुरेश दास व तुलसी दास के घर की तलाशी ली, लेकिन शराब नहीं मिली। ग्रामीणों की मानें तो पुलिस आने के पहले ही विक्रेता ने पीछे के दरवाजे से शराब को गायब कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जब शराब बिक्री की जानकारी स्थानीय पुलिस को लोग देते हैं तो पुलिस खुद इसकी जानकारी शराब विक्रेता को दे देती है और ग्रामीणों की आंखों में धूल झोंकने के लिए दिखावे में छापेमारी करते हैं। इधर सुरेश दास ने कहा कि शराब बेचने का झूठा आरोप लगाकर मुझे बार-बार परेशान किया जा रहा है। पूछने पर थाना प्रभारी रूपेश कुमार सिंह ने कहा कि अवैध शराब बिक्री की शिकायत पर मुखिया सुरेश दास को समझने गए थे। पुलिस ने भी वहां पहुंचकर सुरेश दास और तुलसी दास के घर की तलाशी ली लेकिन शराब नहीं मिला। कहा कि पुलिस गाड़ी रोके जाने तथा लॉकडाउन में भीड़ इकट्ठा होने को लेकर मामला दर्ज किया जाएगा। समाचार भेजे जाने तक मुखिया शंकर पासवान भी हमले के विरुद्ध मामला दर्ज कराने की तैयारी में थाना में डटे थे।

Posted By: Jagran

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