आशीष कुमार जायसवाल, डुमरी (गिरिडीह) : उग्रवाद प्रभावित अतकी पंचायत के धावाटांड़ से मंझलाडीह तक सड़क जर्जर हो जाने की वजह से आवागमन में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि इस रोड को वर्ष 2005 में आरईओ की ओर से बनाया गया था, लेकिन मरम्मत के अभाव में सड़क का हाल बदतर हो गया है। बाद में ग्रामीण दीपक सिन्हा, दिलीप महतो, ऋषि महतो व संजय महतो ने श्रमदान कर जर्जर रोड व पुलिया की मरम्मत की थी। आलम यह है कि रोड की सुध किसी जनप्रतिनिधि व अधिकारी ने इसकी खबर नहीं ली है।

सात किलोमीटर सड़क बन जाने से लगभग 12 हजार ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी। पूरी सड़क के बीच चार पंचायत एवं 18 गांव आते हैं। सड़क के जर्जर हो जाने से कभी-कभी गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। अगर किसी तरह पहुंच भी जाती है तो रास्ता उबड़-खाबड़ होने से गर्भवती महिलाओं एवं अन्य मरीजों को ले जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां के लोगों को अस्पताल जाने के लिए डुमरी 15 किलोमीटर या गिरिडीह 35 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। धावाटांड़ के सामुदायिक भवन में एएनएम ड्यूटी पर आती हैं।

जागरण से बातचीत में गांव के लोगों ने पेयजल की समस्या पर कहा कि चुटरुगबेड़ा, केंदुआडीह, पेडराबांध, बरमसिया, धावाटांड़, फतेहपुर, मंझलाडीह, परसाबेडा, बरगड्डा आदि में जलस्तर कम हो गया है। अतकी पंचायत के हुडरोटांड़ निवासी बुजुर्ग बद्री महतो ने बताया कि लॉकडाउन के कारण वह सुबह उठकर शौचालय से आने के बाद मास्क लगाकर खेत में जुताई करके घर लौटते हैं। स्नान व नाश्ता करने के बाद चबूतरे पर बैठकर फोन से बात कर साथियों से अन्य जानकारी लेते हैं। कब तक टूटेगा लॉकडाउन इसके बारे में एक-दूसरे से जानने की कोशिश करते हैं। दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह-सुबह जंगल की ओर वह दौड़ने जाता है। इसके बाद योगाभ्यास करता है। प्रतिदिन सुबह बकरियों के लिए पत्ता तोड़कर लाता है व घर पर रहकर अगल-बगल व घर के बच्चों को पढ़ाता है जिससे समय भी कट जाता है व बच्चों की पढ़ाई भी हो जाती है। समय मिलने पर मित्रों से बातचीत कर लेता है, जिससे खुशी महसूस होती है।

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कुछ ग्रामीणों ने श्रमदान कर व मिट्टी डालकर ठीक-ठाक किया था। अपने स्तर से इस रोड को लेकर सक्षम अधिकारी से पत्राचार भी किया था, लेकिन आज तक इस पर किसी भी प्रकार का काम नहीं हुआ। हम झारखंड सरकार व जनप्रतिनिधियों से अविलंब सड़क का निर्माण कराने की मांग करते हैं।

-दीपक श्रीवास्तव, प्रखंड अध्यक्ष, भाजयुमो।

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-धावाटांड़ से फतेहपुर होते हुए मंझलाडीह तक सड़क की हालत जर्जर हो जाने से ग्रामीणों को आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो मोटरसाइकिल से आते जाते लोग गिर जाते हैं। धावाटांड़ से हुंडरोटांड़, बंगाली टोला होते हुए बरमसिया तक की रोड बहुत जर्जर है। इससे ग्रामीणों को आने जाने में काफी परेशानी होती है। सांसद व विधायक को कई बार जानकारी देने के बाद भी सड़क नहीं बन पाई है। इस पर जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए।

-पंचानंद राय, ग्रामीण।

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-सड़क के बन जाने से ग्रामीणों को उठापटक की जिदगी से निजात मिल जाएगी। बनने के बाद से इस रोड का काम नहीं हुआ है जिस कारण इसमें काफी गड्ढे हो गए हैं जिससे दुर्घटना की संभावना हमेशा बनी रहती है।

-टुक्लेश्वर महतो, ग्रामीण।

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-जब भी किसी महिला को प्रसव कराने गिरिडीह या डुमरी जाने की आवश्यकता पड़ती है तो खराब सड़क होने के कारण महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो एंबुलेंस घर तक नहीं जा पाती है। इस पर जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए।

-कपिल ठाकुर, ग्रामीण।  

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-वे लोग किसान हैं। गर्मी का समय है व चापाकल सूख गया है। ग्रामीण आधा किलोमीटर दूर से पानी लाकर पीते हैं।

- भीम हजाम, ग्रामीण।

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-यह सड़क वर्ष 2005 में बनी थी। उसके बाद से अभी तक इसकी मरम्मत नहीं होने के कारण इसकी स्थिति बद से बदतर हो गई है। इस पर विधायक सह मंत्री को ध्यान देकर बनवाने की पहल करनी चाहिए।

-सुरेन्द्र पांडेय, ग्रामीण, अतकी।

Posted By: Jagran

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