त्रिभुवन कुमार, तिसरी (गिरिडीह) : करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी तिसरी प्रखंड मुख्यालय सहित इससे सटे कई गांवों में व्याप्त पेयजल संकट को दूर नहीं किया जा सका है। आज भी मुख्यालय की आधी आबादी को पेयजल संकट से जूझ रही है। तालाब, आसपास के जलस्त्रोतों व कूपों से  लोग पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।

काफी लोग पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझाने को विवश हैं। यहां का यह एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन इस ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है। इसके प्रति सांसद-विधायक का रवैया भी उदासीन ही रहा है।

मुख्यालय में पेयजल समस्या दूर करने के लिए 2005 में लगभग 52 लाख की लागत से  पानी टंकी व डीप बोरिग का निर्माण माइका थाना स्थित परिसर में  पीएचईडी विभाग ने कराया था। संबंधित ठेकेदार व विभाग की मनमानी और भ्रष्टाचार की भेंट यह योजना चढ़ गई। पानी टंकी लीकेज कर गई। जब पानी की आपूर्ति कई माह के बाद भी नहीं हुई तो स्थानीय लोगों ने आंदोलन किया। इसके बाद पानी टंकी की मरम्मत कराई गई, लेकिन इसके बाद भी यह सफल नहीं हुई। पंचायती राज आने के बाद पंचायत समिति की बैठक में आवाज उठाई गई तो नए सिरे से रीजनल स्थित पुराना कूप से पेयजल आपूर्ति के लिए करोड़ों रुपये की लागत से 2014-15 में पाइप लाइन को हटिया, चिलगिली, केवटा, पदनाटांड़, तिसरी आदि गांवों में बिछाई गई। लोगों को आस जगी कि अब पेयजल की समस्या से निजात मिलेगी। जिसके लिये छह सौ से अधिक घरों के लोगों ने निश्चित राशि देकर कनेक्शन लिया। पेयजल की सप्लाई शुरू की गई, लेकिन कुछ ही माह में यह भी योजना फेल हो गई। गर्मी के समय सप्लाई देने वाला कूप घर में लगा उपकरण जल गया, जिस कारण आधी आबादी तक पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। तिसरी चौक के बाद केवटा, चिलगिली के लोगों को पानी मिलना बंद हो गया।  पानी नहीं पहुंचने से उपभोक्ताओं ने काफी हल्ला मचाया, लेकिन इसकी सुध विधायक व सांसद ने नहीं ली। बहरहाल, आज भी मुख्यालय के कई गांव पानी के लिए त्राहिमाम है।

नितेश सिंह ने कहा कि तिसरी मुख्यालय में पानी सप्लाई की स्थिति दयनीय है। कनेक्शन लेने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। गर्मी में पानी की किल्लत से परेशान हो जाते हैं। किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस समस्या से निजात दिलाने की कोशिश नहीं की है। इस योजना से आम जनता को फायदा तो नहीं हुआ, लेकिन ठेकेदार और विभाग की झोली जरूर भर गई। सिकंदर बरनवाल ने कहा 14 साल से पानी के लिए लोग जूझ रहे हैं। किसी ने इसकी सुध नहीं ली। सांसद व विधायक मूकदर्शक बने हुए हैं।

नागेंद्र कुमार ने कहा कि तिसरी पानी सप्लाई योजना की जांच हो। करोड़ों रुपये खर्च के बाद आम जनों को लाभ नहीं मिल रहा है। संबंधित ठेकेदार व विभाग की मिलीभगत उजागर करती है।

Posted By: Jagran

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