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-बीडीओ से मिले खरपोका के कार्डधारी

संस, पीरटांड़ (गिरिडीह): खरपोका के पीडीएस दुकान से दिसंबर माह का अनाज वितरण नहीं करने को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार को प्रखंड कार्यालय जाकर बीडीओ से मुलाकात की। ग्रामीणों का आरोप है कि पीडीएस दुकान में अनाज वितरण में मनमानी की जा रही है। दिसंबर के अनाज का वितरण ही नहीं हुआ। अभी जनवरी का अंतिम दिन चल रहा है। ऐसे में दिसंबर के अनाज का वितरण ना कर जनवरी का किया जा रहा है। जब अनाज मांगा गया तो बोला गया कि दिसंबर का अनाज आया ही नहीं है। इसकी जानकारी लेने बीडीओ दिनेश कुमार के पास ग्रामीण पहुंचे तो मामला कुछ अलग निकला। प्रत्येक माह प्रखंड कार्यालय के गोदाम से डीलरों के पास अनाज पहुंच रहा है पर वे वितरण नहीं कर रहे हैं। शिकायत करने आए लोगों से बीडीओ ने कहा कि दिसंबर का दोनों अनाज दुकानदार के पास गया है। आश्वासन दिया कि 28 जनवरी को वे खुद जांच के लिए वहां जाएंगे। बता दें कि खरपोका में आयशा स्वयं सहायता समूह की पीडीएस दुकान संचालित है। जब सोमवार को लोग अनाज मांगने गए तो संचालक बाबूजान नामक व्यक्ति ने बताया कि दिसंबर माह का अनाज वितरण के लिए उसे नहीं मिला है। इसी से लोग आक्रोशित हो गए।

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दिसंबर में मिलने वाले आनाज की कालाबाजारी

संस, पीरटांड़ : कोविड के कारण केंद्र व राज्य सरकार अलग अलग राशन गरीबों को उपलब्ध करा रही है। पर प्रत्येक माह सही ढंग से इसका वितरण इस प्रखंड में नहीं हो रहा है। इसके लिए प्रखंड के विभिन्न इलाके से बीडीओ व एमओ के पास शिकायतें आ रही हैं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रखंड के सिमरकोढ़ी, चिरकी, बदगावां, चिलगा, व नावाडीह पंचायत से अनाज वितरण में गड़बड़ी की शिकायत आती रही है पर उस शिकायत पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। कुछ माह पहले सिमरकोढ़ो के सैकड़ों कार्डधारी बीडीओ के पास पहुंचे थे पर दुकानदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह चिरकी, बांध आदि पंचायतों में कार्रवाई हुई ही नहीं जिससे अनाज की कालाबाजारी और तेजी से हो रही है।

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ऐसे हो रही कालाबाजारी : जनवितरण प्रणाली से जुड़े लोग ही नाम नहीं छापने के शर्त पर बताते हैं कि पीडीएस गोदाम से ही अनाज की कालाबाजारी का प्लान तैयार होता है। माह के 15 व 25 तारीख को चावल दिवस मनाकर दोनों माह का अनाज वितरण करने का नियम है। पर गोदाम से समय पर डीलरों के पास अनाज नहीं भेजा जाता है। जिस माह का अनाज होता है उसी माह में गोदाम से उसे भेजना होता है। गोदाम से दूसरे माह में अनाज भेजा जाता है। अब दुकानदार एक माह के लिए आए अनाज को वितरण करने में दो माह से अधिक समय लगा देते हैं। इस तरह समय पार हो जाता है और अनाज की कालाबाजरी हो जाती है। बीते दिसंबर माह के साथ यही हुआ है। नवंबर माह का अनाज दिसंबर में वितरण किया गया और दिसंबर का अनाज वितरण नहीं हो पाया।

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दिसंबर माह का अनाज चला गया है। एसआइओ देखने के बाद ही तारीख का पता चलेगा। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

- रविद्र उरांव, प्रभारी आपूर्ति पदाधिकारी, पीरटांड़

Edited By: Jagran