गिरिडीह, जेएनएन। वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के लिए झारखंड, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों में 31 मार्च तक लॉकडाउन कर दिया गया है। यात्री ट्रेनों की आवाजाही पूरे देश में 31 मार्च तक बंद कर दी गई है। कई राज्यों ने अपनी सीमाएं सील कर दी है। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए सरकार ने एहतियात के तौर पर यह कार्रवाई की है। सरकार की इन कार्रवाइयों के कारण सिर्फ गिरिडीह जिले के करीब बीस हजार से अधिक प्रवासी मजदूर मुंबई, पुणे, दिल्ली, हैदराबाद, सूरत, कोलकाता जैसे बड़े-बड़े शहरों में फंस गए हैं।

बगोदर प्रखंड की सिर्फ बेको पंचायत के पांच सौ से अधिक मजदूर बाहर फंसे हुए हैं। फंसनेवाले मजदूरों में सबसे अधिक संख्या बगोदर, डुमरी, राजधनवार, गावां एवं तिसरी की हैं। लॉकडाउन के कारण इनका रोजगार समाप्त हो गया है। घर लौटने का कोई साधन नहीं है। न कोई होटल खुला है और न ही जहां ये काम करते थे, वहां इनके लिए भोजन का कोई प्रबंध है। ऐसे में इनके पास भोजन के लाले पड़ गए हैं। संबंधित राज्य सरकारों की ओर से भी इनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इनके परिजन भी इससे काफी परेशान हैं। ऐसे प्रवासी मजदूरों ने झारखंड सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

गिरिडीह जिले के बगोदर, डुमरी एवं धनवार इलाके के प्रवासी मजदूर पूरे देश की बात छोड़िए, सात समंदर पार भी रोजगार के लिए पलायन कर गए हैं। प्रवासी मजदूरों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने बताया कि अनुमानित तौर पर गिरिडीह जिले के बीस हजार से अधिक प्रवासी मजदूर बाहर के राज्यों में फंसे हुए हैं। इनके लिए न तो वहां की सरकार कुछ कर रही है और न ही झारखंड की सरकार। बगोदर के बेको निवासी मुमताज अंसारी मुंबई के अंटा फिल में गारमेंट की कारखाना चलाते हैं। उन्होंने मोबाइल पर दैनिक जागरण से बातचीत में बताया कि कोरोना को लेकर मुंबई में सब कुछ ठप हो चुका है।

गारमेंट क्षेत्र में बगोदर एवं डुमरी के दस हजार से अधिक मजदूर यहां काम करते हैं। इनमें से अधिकांश ऐसे हैं जो अकेले वहां रहते हैं। खुद उनकी फैक्ट्री में बगोदर के करीब 20 मजदूर काम करते है। इन मजदूरों के लिए वहां भोजन पर आफत हो गया है। मुंबई से गिरिडीह बस रिजर्व कर इन्हें वापस भेजने के लिए कई कंपनियां तैयार हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण कोई भी बस जाने को तैयार नहीं है। तत्काल कुछ प्रबंध नहीं किया गया तो स्थिति काफी भयावह हो जाएगी। बेको के ही रहनेवाले रियाज मुंबई में गारमेंट सेक्टर में काम करते हैं। वे भी बेरोजगार हो चुके हैं। उनके समक्ष भी खाने का संकट है। उन्होंने बताया कि मजदूरों के पास पैसे है, लेकिन कहीं भी खाने की सुविधा बाजार में नहीं है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

राजधनवार विधानसभा क्षेत्र के हजारों मजदूर हैदराबाद समेत विभिन्न बड़े शहरों में जूस बेचने एवं जूस दुकानों में मजदूरी करते हैं। इन मजदूरों के पास भी रोजगार एवं भोजन का संकट आ गया है। मजदूर घर वापसी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। केक फैक्ट्री में काम करनेवाले डुमरी प्रखंड के बनखारो गांव के निवासी सिकंदर यादव भी मुंबई में फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ डुमरी एवं बगोदर के पचास से अधिक मजदूर फंसे हुए हैं। घरवाले परेशान हैं। बगोदर के फंसने वाले मजदूरों में तसलीम अंसारी, अताउल्लाह अंसारी, सद्दाम अंसारी, मनोहर अंसारी, शाहिद अंसारी आदि शामिल हैं।

अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों की हो उचित व्यवस्था

विनोद भाकपा माले विधायक विनोद ¨सह ने अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए उचित व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन जरूरी है, लेकिन विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंड के छात्र और मजदूरों को उनके बुरे हाल पर छोड़ देना ठीक नहीं। माले विधायक ने कहा कि कारखाने, मॉल, व्यवसाय और शिक्षण संस्थान बंद होने के कारण विभिन्न राज्यों में गए छात्रों और मजदूरों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। संस्थान बंद होने के कारण उनके पास रहने की कोई जगह नहीं बची है। केंद्र तथा संबंधित राज्य सरकारों के अलावा झारखंड सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। उन शहरों में विशेष शिविर लगाकर रहने और भोजन का इंतजाम किया जाए।

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