किशुन प्रसाद कुशवाहा, सरिया (गिरिडीह) : पांच दिनों के अंदर फकीरापहरी गांव में दस लोगों की मौत होने के बाद पूरा सरिया बाजार सहम गया है। प्रतिदिन फकीरापहरी गांव से शव यात्रा निकलते देख लोग अज्ञात डर से घबरा जा रहे हैं। बड़े क्या छोटे बच्चों के चेहरे पर भी डर की रेखा आसानी से देखी जा सकती है। उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा ने इन मौतों का कारण अत्यधिक शराब का सेवन करना बताया है। इसके बाद सरिया व आसपास के इलाकों में शराब को लेकर काफी भय देखा जा रहा है। सरिया व आसपास का इलाका अवैध महुआ शराब व नकली अंग्रेजी शराब बनाने का गढ़ रहा है। कल तक जिस व्यक्ति के पास बाजार घूमने के लिए साइकिल तक नहीं थी, वह आज इस धंधा को अपनाते ही करोड़ों रुपये का मालिक बन बैठा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह धंधा कितना फलफूल रहा है।

शराब के खिलाफ स्वयंसेवी संस्थाओं और महिला संगठनों की ओर से बार-बार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इसका असर भी क्षेत्र में देखा जाता है, लेकिन कुछ दिन बाद धंधेबाज एवं प्रशासनिक गठजोड़ के कारण पुन: यह धंधा चालू हो जाता है।

कार्रवाई का नहीं दिख रहा असर :

बंदखारो, चिचाकी, छोटकी सरिया, बागोडीह, सबलपुर, निमाटांड, केसवारी, औरवाटांड़, ठाकुरबाड़ी टोला आदि इलाकों को अवैध महुआ शराब का बडा गढ़ माना जाता है। जब भी आबकारी विभाग की टीम इस क्षेत्र में घुसती है तो दर्जनों अवैध शराब भट्ठी को तहस-नहस करके जाती है, लेकिन अगले दिन पुन: यह धंधा शुरू हो जाता है।

केवल बंदखारो पंचायत में करीब एक सौ अवैध शराब भट्ठी संचालित होती है। इसके अलावा सरिया शहरी क्षेत्र के ठाकुरबाड़ी टोला, कोवडिया टोला, पांडेय टोला, बड़की सरिया आदि इलाकों में दर्जनों शराब भठ्ठी संचालित होती है। रात भर शराब बनाने के बाद बाइक, साइकिल एवं अन्य संसाधनों से इसे क्षेत्र के दर्जनों इलाकों में पहुंचाया जाता है। बिरनी, बगोदर, डुमरी आदि जगहों में भी इसकी आपूर्ति की जाती है। धंधे में जुड़े लोगों का सिर्फ एक मकसद होता है पैसा कमाना। इन्हें लोगों की जिदगी से कोई मतलब नहीं रहता।

शराब में मिलाया जाता हानिकारक पदार्थ : कैसे शुरू होता है यह खेल : महुआ, गुड़, नौशादर, स्प्रिट, यूरिया, नशीली दवा फोटवींन सहित कई केमिकल मिलाकर अवैध महुआ व नकली विदेशी शराब तैयार की जाती है। ये सामग्री खुलेआम सरिया बाजार में उपलब्ध हैं, जिस कारण अवैध ढंग से शराब का निर्माण कर लिया जाता है। स्प्रिट भी इस धंधे से जुड़े तस्करों को सेटिग-गेटिग के तहत उपलब्ध करा दिया जाता है।

ऐसे रुकेगा अवैध धंधा :

अगर प्रशासन को अवैध शराब के धंधे को रोकना है तो सबसे पहले स्प्रिट की तस्करी पर रोक लगानी होगी। साथ ही सरिया बाजार में 4-5 ठिकानों पर गलत ढंग से बिक रहे महुआ की बिक्री और बिना लाइसेंसी दुकानों से खाद व किटनाशक की बिक्री को भी बंद कराना होगा। इसके अलावा पुलिस अपने तंत्र को मजबूत कर धंधेबाजों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी अभियान और जागरूकता

कार्यक्रम चलाकर इस धंधे को रोक सकती है।

छापेमारी के पूर्व धंधेबाजों को मिल जाती सूचना :

पुलिस, आबकारी विभाग एवं प्रशासनिक महकमा के कई अधिकारी क्षेत्र से अवैध शराब के धंधे को बंद करने और इससे जुड़े लोगों को सलाखों के पीछे डालने के लिए ईमानदारी से प्रयास भी करते हैं, लेकिन छापेमारी के पूर्व इनके ही विभाग के कुछ भ्रष्ट लोगों की सूचना पर इस धंधे से जुड़े लोग सतर्क हो जाते हैं। वे छापेमारी टीम पहुंचने के पहले ही फरार हो जाते हैं। धंधेबाज कई बार इन ठिकानों से भागकर महिला सदस्यों को भी आगे कर देते हैं, जिस कारण पुलिस की कार्रवाई में थोड़ी बाधा पहुंचती है। अगर विभाग पूर्णरूपेण अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाना चाहता है तो औचक छापेमारी करे। साथ ही महिला सुरक्षा कर्मियों के साथ छापेमारी अभियान चलाए। विभाग में छिपे ऐसे गुप्तचरों की भी पहचान कर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

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डुमरी में बेखौफ चल रहा शराब का अवैध धंधा

संस

डुमरी : प्रखंड के दोनों थाना क्षेत्रों डुमरी एवं निमियाघाट के विभिन्न गांव-

मोहल्लों व जीटी रोड किनारे स्थित लाइन होटलों में अवैध महुआ व अंग्रेजी शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। पुलिस प्रशासन की कोशिशों के बावजूद महुआ शराब की अवैध चुलाई एवं बिक्री पर लगाम नहीं लग रहा है। जीटी रोड किनारे स्थित लाइन होटलों में शराबपरोसी जाती है। करिहारी पहाड़ी की तलहटी में बनी झोपड़ियों में तो  अवैध महुआ शराब पीनेवालों की भीड़ आसानी से देखी जा सकती है। अहले सुबह अवैध महुआ शराब की चुलाई करनेवाले धंधेबाजों को जार में भरकर महुआ शराब को बाइक व साइकिल से ले जाते देखा जा सकता है। हालांकि अब शराब को निर्धारित स्थल तक पहुंचाने का तरीका धंधेबाजों ने बदल लिया है। धंधेबाज शराब पहुंचाने के लिए बच्चों का उपयोग करते हैं।

इन जगहों पर होती शराब की चुलाई व बिक्री : डुमरी थाना क्षेत्र की बेलदारी टोला, जोल्हाडीह, धनहरा, अमरा, ससारखो, भंडारो पंचायत के तांबागुड़ियो, दुधपनिया, जमुनिया नदी किनारे, बरीटोला, चेगरो, घुटवाली, गांधीनगर आदि तथा निमियाघांट थाना क्षेत्र के जरूवाडीह, टिगरा, खांकी पोरदाग, रेलवे फाटक के समीप, नगलो के जंगली क्षेत्र, केंदुआडीह, तुरी टोल, रेलवे स्टेशन के समीप, गट्टीगढ़हा, बलथरिया,नगरी, लक्ष्मण के समीप संचालित एक होटल, दुधपनिया, उत्तराखंड क्षेत्र के तेलखारा, तिरंगा मोड़, राजाबेड़ा आदि क्षेत्रों में अवैध महुआ शराब की चुलाई व बिक्री की जाती है। कई क्षेत्रों में अंग्रेजी मिलावटी शराब की बिक्री धड़ल्ले से जा रही है। उक्त स्थानों में

कई स्थान ऐसे हैं जहां अवैध महुआ शराब की चुलाई के लिए मशीन का

उपयोग किया जाता है। 

होली को देखते हुए तैयार किया जा रहा स्टाक : होली को लेकर धंधेबाज अंग्रेजी शराब का स्टॉक शुरू कर दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि धंधेबाज क्षेत्र में शराब की मांग की पूर्ति के लिए चंडीगढ़ तथा  हरियाणा से नकली अंग्रेजी मंगा रहे हैं।

ट्रेनों से बिहार भेजी जाती शराब :

धंधेबाज पारसनाथ  रेलवे स्टेशन से रात्रि में गुजरनेवाली विभिन्न ट्रेनों के माध्यम से बिहार व अन्य क्षेत्रों में पाउच एवं अंग्रेजी शराब भेजते हैं। धंधेबाज ट्रॉली बैगों एवं ब्रीफकेस में भरकर शराब भेजते हैं, ताकि कोई परेशानी न हो और पुलिस की नजर भी नहीं पड़े। कई बार पुलिस छापेमारी कर शराब जब्त कर चुकी है।

कई बार बड़ी खेप भी पकड़ी है। एसपी सुरेन्द्र झा को मिली गुप्त सूचना के आलोक में स्थानीय व जिला पुलिस शराब की कई बड़ी खेप पकड़ चुकी है, लेकिन फिर भी अंग्रेजी नकली एवं महुआ शराब का धंधा बेरोकटोक जारी है। उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों से भारी मात्रा में नकली अंग्रेजी शराब, कच्चा स्प्रिट व शराब बनाने की सामग्री बरामद भी कर चुकी है, लेकिन धंधेबाजों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है।

सार्वजनिक स्थलों के पास खुल गई लाइसेंसी शराब दुकान :

सरकार ने लाइसेंसी शराब दुकान के संचालन के लिए कई नियम बनाए हैं। किसी विद्यालय व मंदिर के आसपास शराब दुकान का संचालन नहीं होना है। साथ ही दुकान के बाहर सीसीटीवी कैमरा व रेट चार्ट लगाना है, लेकिन प्रखंड के लगभग सभी सरकारी लाइसेंसी शराब दुकान उक्त नियमों का खुलेआम उल्लंघन करती है। संबंधित विभाग व पुलिस मौनी बाबा बने हुए हैं। शराब दुकानदार बीयर को ठंडा करने के एवज में निर्धारित मूल्य से अधिक राशि की वसूली करते हैं।

क्या कहते धंधेबाज :

महुआ शराब की चुलाई व अंग्रेजी मिलावटी शराब के धंधे में शामिल अधिकांश धंधेबाजों ने बताया कि सरकारी शराब दुकानों में संचालक शराब के निर्धारित मूल्य से 10-4 रुपये अधिक दाम वसूलते हैं।

हालांकि धंधेबाज महुआ शराब की चुलाई में यूरिया व नौशादर का प्रयोग करने संबंधी सवाल पूछने पर चुप्पी साध जाते हैं।

Posted By: Jagran

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