तिसरी (गिरिडीह) : चाइल्ड लाइन के प्रयास से प्रखंड के उग्रवाद प्रभावित गांव जलगोड़ा के एक आदिवासी दंपती को चार साल के बाद बुधवार को उनकी बेटी वापस मिल गई। इससे दंपती काफी खुश हैं। उसे बाल मजदूर गिरोह के चंगुल से छुड़ाकर लाया गया। जानकारी के अनुसार जलगोड़ा की एक 15 वर्षीय किशोरी को जमुआ थाना क्षेत्र के बाल मजदूर गिरोह के लोग बढि़या नौकरी व पढ़ाई कराने का लालच देकर 2016 में दिल्ली ले गए थे। एक साल बीतने के बाद बेटी से उसके अभिभावक का संपर्क टूट गया। फोन से भी उनकी बातचीत नहीं हो पा रही थी। इससे किशोरी के परिजन काफी परेशान हो गए। बेटी को ले जाने वाले व्यक्ति से संपर्क किया तो वह आज-कल कर टालता रहा। अंत में अक्टूबर 2019 को चाइल्ड लाइन को इसकी खबर की गई। संस्था के लोगों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लड़की को ले जानेवाले व्यक्ति पर दबाव बनाया तो पता चला कि वह दिल्ली के पंजाबीबाग की एक कोठी में काम कर रही है। चाइल्ड लाइन के प्रयास से किशोरी को ट्रेन से जसीडीह स्टेशन लाया गया। इसके बाद तिसरी में इंतजार कर रहे माता-पिता को उसे सौंप दिया गया। चाइल्ड लाइन सब सेंटर तिसरी के सवेरा फाउंडेशन के अजय मिश्रा ने कहा कि दिल्ली में बाल व्यापार करने वाले एक व्यक्ति बाल मजदूरी करवाने को उक्त लड़की को ले गया था। तीन साल से माता-पिता से उसका संपर्क टूट गया था। दिल्ली के पंजाबीबाग से बरामद कर माता-पिता को लड़की को सौंप दिया गया। इससे लड़की व उसके माता पिता काफी खुश हैं।

Posted By: Jagran

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