तिसरी (गिरिडीह): अवैध ढिबरा के कारोबार पर संबंधित विभाग की ओर से नकेल कसने के दस महीने बाद ढिबरा कारोबार एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। पड़ताल करने के बाद यह तथ्य सामने आया कि तिसरी के छोटे-बड़े व्यवसायियों ने ढिबरा की खरीदारी तो बंद कर दी है, लेकिन एक-दो बड़े व्यवसायी इस कारोबार पर ही निर्भर होकर व लोगों को सक्रिय कर चोरी छिपे जंगल व वन सीमा में स्थित खदान से ढिबरा का उत्खनन करवा रहे हैं। मजदूरों से ढिबरा कौड़ी के भाव में खरीदकर उसे ऊंचे दाम में बेचा जाता है। गावां प्रखंड के मालदा गांव के एक बड़े व्यवसायी के इशारे पर यह खेल चालू है। कई लोग पुलिस प्रशासन व वन विभाग की नजर से बचकर रात के अंधेरे में ट्रक से तारोनाखो होते हुए कोडरमा तक इसकी सप्लाई बेखौफ कर रहे हैं। तिसरी के मैनी व झगडैया में ढिबरा का अवैध उत्खनन जारी है। घटना के बाद दोनों जगहों पर फिलहाल इसे बंद किया गया है। घटना के पहले झगड़ैया के अलावा मैनी पहाड़ में दो तीन जगहों पर खदान से ढिबरा का उत्खनन व चुनाई कर एक जगह जमाकर रात में ट्रक व हाइवा में लोडकर कोडरमा भेज रहे हैं।

इसका कारोबार बंद रहने से मजदूरों से कौड़ी के भाव में वे इसे ले रहे हैं। जो ढिबरा 20 रुपये किलो बिकता था वह पांच सात रुपये लिया जा रहा है। ढिबरा पर निर्भर मजदूर मजबूरन पैसे के लालच में उन्हें ढिबरा दे दे रहे हैं। पहले एक ही स्थान पर एक से चार लोग खरीदने वाले होते थे जिससे उन्हें सही दाम मिलता था। काम बंद कहकर उसे कम दाम में लिया जा रहा है।

तिसरी के एक व्यवसायी का कहना है कि एक जिला में दो कानून चल रहा है। तिसरी में कारोबार पुरी तरह ठप है यहां के दो चार लोग कोडरमा भेजने वाले लोग की इशारे पर चोरी छिपे जंगल व पहाड़ से ढिबरा जमा कर कोडरमा भेजी जा रही है।गांवा प्रखंड के मालडा के एक बड़ा व्यवसायी का आज भी कारोबार तिसरी गांवा में फैला हुआ है।

तिसरी-तिसरी प्रखंड में अवैध कारोबार के कारण एक साल में कई गरीब मजदूर की मौत हो गई।अवैध कारोबारी का दब दबा इस तरह की होती है कि मरने वाले का परिजन भी खुल कर नही बोल पाते है।खदान में दब कर मरने वालों को इस क्षेत्र का रोजगार का हवाला देकर भी चुप कराया जाता है।बता दे कि 2019 में फरवरी माह में गोलगो के हिरापहाडी खदान में एक महिला मजदूर की मौत हुई थी।छह अप्रैल को महुआ टांड गांव के पूरब दिशा में अजय पहाड़ी में स्थित ढिबरा खदान में दो मजदूर की मौत, बरवाडीह में एक बच्चा की मौत सहित कई घटना घटी जिसका लीपापोती की गयी। इसके बाद वन विभाग व प्रशासन की दबिश के बाद कारोबार में ग्रहण लगा हुआ है।

Posted By: Jagran

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