संवाद सूत्र, मेराल (गढ़वा):

कोरोना महामारी के साथ खाद्य सामग्रियों की बेतहाशा महंगाई की दोहरी मार से मध्यम वर्गीय, निम्न मध्यम वर्गीय,तथा गरीब परिवार त्राहि-त्राहि कर रहा है। इस महामारी ने इंसानी जीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। इस दौरान रोजी रोजगार प्रभावित होने के कारण अधिकांश लोगों की माली हालत खराब हो चुकी है। इस संकट काल में कोई महंगाई की मार से परेशान है तो कोई तो कोई बाजार की मंदी से एक ओर जहां कई आवश्यक खाद्य सामग्रियों की कीमत आसमान छू रही है तो दूसरी ओर बाजार में गरीब किसान की उत्पादित सब्जी के पर्याप्त खरीददार नहीं मिल रहे। सब्जी की कीमत इतनी गिर गई है कि किसानों को लाभ मिलना तो दूर, लागत भी नहीं निकल पा रहा। आर्थिक मंदी का प्रभाव बाजार पर सीधा नजर आ रहा है, जो टमाटर कभी 50 रुपये प्रति किलो बिकता था आज 5 रुपये किलो बिक रहा है। कमोबेश सभी सब्जियों की यही स्थिति है, कद्दू 5 रुपये किलो, नेनुआ 10 रुपये किलो, झींगी 15 रुपये किलो, करेला 20 रुपये किलो, खीरा देहाती 10 रुपये किलो, प्याज 10-15 रुपये किलो, हरा एवं लाल साग 5 रुपये किलो मेराल के बाजार में बिक रहा है। सब्जी बेचने आए किसान शिवनाथ कुशवाहा, लालमणि महतो, भोला कुशवाहा, रविद्र महतो इत्यादि ने बताया कि बाजार मंद होने के कारण, सब्जी उत्पादन का लागत भी नहीं निकल पा रहा है। सब्जी उत्पादन के दौरान शारीरिक श्रम की बात तो दूर महंगी दर पर खरीदी गई खाद, बीज तथा दवा की कीमत भी नहीं निकल रही है। इसके ठीक विपरीत कई आवश्यक खाद्य सामग्रियों की कीमत आसमान छू रही है। सरसों तेल बाजार में 165 रुपए लीटर साधारण रिफाइन भी 150 लीटर हो गया है। इतना ही नहीं दाल, मसाले, सहित कई आवश्यक भोजन सामग्रियों की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है। बाजार में पेट्रोलियम पदार्थ की कीमत से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। जिसका प्रभाव बाजार की हर चीज पर पड़ा है। चाहे महंगाई बड़े या बाजार में मंदी आए इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव मध्यम वर्गीय परिवार, निम्न मध्यमवर्गीय परिवार तथा गरीब परिवार पर पड़ा है जिसके कारण इनके समक्ष अपना अस्तित्व बचाने कि संकट आ खड़ी है। कोरोना संक्रमण से जान बचाने से लेकर भुखमरी का संकट आ खड़ा है।