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गढ़वा में सोन नदी का पानी बढ़ने से फसलों को भारी नुकसान, मवेशियों की जान पर संकट

Published: Fri, 04 Sep 2026 05:58 PM (GMT+05:30)

गढ़वा के खरौंधी प्रखंड में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आ गई है, जिससे करीब 50 एकड़ फसलें डूब गई हैं और किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

सोन नदी का पानी बढ़ने से फसलों को भारी नुकसान

सोन नदी का पानी बढ़ने से फसलों को भारी नुकसान

HighLights

  1. सोन नदी में बाढ़ से 50 एकड़ फसलें डूबीं।

  2. खेतों में लगे मोटर-समरसेबल भी पानी में डूबे।

  3. नदी के टीले पर 50 मवेशी फंसे, खतरा।

संवाद सूत्र, खरौंधी (गढ़वा)। खरौंधी प्रखंड क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सोननदी में पिछले तीन दिनों से लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण नदी उफान पर है। सोन नदी में आई बाढ़ से तटीय इलाकों में भय का माहौल बना हुआ है। 

बाढ़ के पानी से किसानों के खेतों में लगी फसल डूब गई है। वहीं, कई मोटर और समरसेबल भी पानी में डूब गए हैं। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से ग्रामीणों को आने वाले समय में और अधिक नुकसान की चिंता सता रही है।

फसल बाढ़ के पानी की चपेट में

सोन नदी की बाढ़ से खरौंधी प्रखंड के खोखा, चंदना, पिपरा, रजखड़ सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अब तक करीब 50 एकड़ खेतों में लगी अरहर, धान और तिल की फसल बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुकी है। 

इसके अलावा खेतों में सिंचाई के लिए लगाए गए करीब पांच मोटर और तीन समरसेबल भी पानी में डूब गए हैं। इससे किसानों को फसल के साथ-साथ सिंचाई उपकरणों के नुकसान की भी चिंता है।

खेतों में लगी फसल डूबने का खतरा 

ग्रामीण पवन कुमार सिंह, पंकज कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, कमलेश कुमार चौधरी, नेबु लाल खरवार और कुमारी देवी ने बताया कि पिछले तीन दिनों से सोन नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। नदी पूरी तरह उफान पर है। यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो सोन नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ खेतों में लगी फसल पूरी तरह डूब सकती है।

ग्रामीणों के सामने एक और गंभीर समस्या मवेशियों को लेकर बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि सोन नदी के बीच स्थित टीला पर गांव के करीब 50 गाय और बैल फंस गए हैं। पानी बढ़ने के कारण इन मवेशियों को सुरक्षित निकालना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सोन नदी का जलस्तर थोड़ा और बढ़ा तो टीला भी पानी की चपेट में आ सकता है और वहां फंसे मवेशियों के बहने का खतरा बढ़ जाएगा। इससे ग्रामीणों में काफी चिंता है।

किसानों को भारी आर्थिक नुकसान

किसानों ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और किसी तरह आसपास के लोगों से उधार लेकर धान, अरहर, तिल सहित अन्य फसलों की बोआई करते हैं। लेकिन प्रत्येक वर्ष सोन नदी में आने वाली बाढ़ उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है। बाढ़ के कारण खेतों में लगी फसल बर्बाद हो जाती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि फसल बर्बाद होने के बाद मुआवजे की उम्मीद में वे पूरे साल प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन आज तक प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है। इससे किसानों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी है। 

उचित मुआवजा दिलाने की मांग

ग्रामीणों ने खरौंधी के बीडीओ और सीओ से सोन नदी की बाढ़ से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण और जांच कराने की मांग की है। किसानों ने प्रशासन से बर्बाद हुई फसलों, मोटर एवं समरसेबल सहित अन्य नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। साथ ही टीला पर फंसे करीब 50 गाय-बैलों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।