गढ़वा में पुलिस टीम पर हमले के मामले में 9 साल बाद बड़ा फैसला, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दोनों आरोपी बरी
गढ़वा व्यवहार न्यायालय ने मेराल पुलिस टीम पर हमले के बहुचर्चित मामले में नौ साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। ...और पढ़ें

मेराल पुलिस पर हमले के मामले में अदालत का फैसला।
संवाद सहयोगी, गढ़वा। मेराल थाना क्षेत्र के बहुचर्चित पुलिस टीम पर हमला करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। गढ़वा व्यवहार न्यायालय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ आशुतोष कुमार पांडेय के न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में मामले के दोनों अभियुक्तों रामकेश राम और बिन्हाई राम को बाइज्जत बरी कर दिया है। करीब नौ साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद आए इस फैसले से बचाव पक्ष में खुशी है।
जानें क्या था पूरा मामला?
घटना 30 अगस्त 2018 की है। मेराल थाना क्षेत्र के चरका पत्थर टोला में जुआ खेले जाने की गुप्त सूचना पर पुलिस टीम छापेमारी करने पहुंची थी। इस टीम में सअनि अशोक कुमार सिंह, गिरवर दास, उमेश मांझी, सिपाही रवींद्र कुमार पासवान, श्रीकांत पासवान, पुलिस वाहन चालक संतोष कुमार तिवारी और चौकीदार अयोध्या राम शामिल थे।
पुलिस का आरोप था कि छापेमारी के दौरान घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना के संबंध में मेराल थाना में कांड संख्या 133/2018 दर्ज किया गया था, जिसमें रामकेश राम और बिन्हाई राम को नामजद अभियुक्त बनाते हुए जेल भेज दिया गया था। बाद में इस मामले का ट्रायल जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ के न्यायालय में (एस.टी. 249/2019) शुरू हुआ।
अदालत में पेश हुए साक्ष्य पड़े कमजोर
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और डाक्टर दीपक कुमार सिन्हा की गवाही न्यायालय में कराई गई। हालांकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता अशोक कुमार तिवारी ने अदालत के समक्ष तर्कों और तथ्यों को मजबूती से रखा।
दोनों पक्षों की बहस और प्रस्तुत साक्ष्यों के बाद न्यायालय ने पाया कि पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोपितों को दोषी सिद्ध करने के लिए अपर्याप्त हैं। 21 अगस्त 2026 को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए रामकेश राम और बिन्हाई राम को सभी आरोपों से मुक्त कर बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक उमेश दीक्षित ने पैरवी की थी।
