कांडी: प्रखंड के राणाडीह गांव में आयोजित श्रीराम चरितमानस नवाह्न परायण पाठ महायज्ञ महोत्सव का विराट उन्तीसवां अधिवेशन धूमधाम से चल रहा है। यज्ञ में वाराणसी से आए आचार्य अवधेश मिश्रा द्वारा प्रतिदिन सुबह से लेकर शाम तक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन पाठ का कार्यक्रम किया जा रहा है। यज्ञ के तीसरे दिन प्रवचन सत्र में श्रोताओं को संबोधित करते हुए अयोध्या से पधारे श्री अशोक दास जी ने कहा कि विश्व का कल्याण व मंगल की कामना संत ही करते हैं। विश्वामित्र जी राष्ट्र मंगल के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को प्राप्त करने के लिए याचक बन कर के महाराज दशरथ के पास आये और श्रीराम व लक्ष्मण को ले जाकर राक्षसों का वध करवा कर यज्ञ का संपादन, श्रीराम का विवाह व जनक जी का धनुष यज्ञ संपन्न करवाये। वाराणसी से आई मानस कोकिला नीलम शास्त्री ने कहा कि मरने से भगवान के भक्तों को डर नहीं लगता है। बल्कि मरने से तो रावण जैसा पापी मनुष्य डरता है। उन्होंने कहा कि संसार का सबसे उत्तम सुख सत्यसंग में है, सत्यसंग से ज्यादा सुख कहीं नहीं है। यज्ञ में परिक्रमा करने वालों की भीड़ उमड़ रही है। यज्ञ 19 फरवरी तक चलेगा। यज्ञ को सफल बनाने में यज्ञ के संरक्षक श्याम सुंदर शर्मा, सह संरक्षक ब्रजमोहन मिश्रा, सचिव श्याम बिहारी दूबे, अध्यक्ष रामप्रवेश चौबे, कोषाध्यक्ष रामचन्द्र पाल, भंडारी जितेंद्र चौबे, यजमान गोपाल चौबे, महेंद्र चौबे, अखलेश चौबे, मंगल चौबे, सत्यनारायण पांडेय, कमलेश्वर पांडेय आदि का सराहनीय योगदान रहा है।

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