कांडी: लमारी कला गांव में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। यज्ञ के तीसरे गुरुवार को दिन अयोध्या से पधारे प्रवचनकर्ता डॉ. पंडित अरुण शास्त्री सुमन जी महाराज ने भगवान श्रीराम व माता सीता के विवाह का संगीतमय प्रस्तुती की। कहा कि जब भगवान श्रीराम बारात लेकर राजा जनक के घर पहुंचे तो राजा जनक सपत्निक पैर धोने के बाद आम के पल्लव से चरणामृत लिया। पैर धोना अहंकार परित्याग का परिचायक है, जो वर्तमान समाज से लुप्त होते जा रहा है। वहीं प्रयागराज से पधारी मानस कोकिला समीक्षा पांडेय ने भगवान श्रीराम की बाल लीला की चर्चा करते हुए कहा कि युग पुरुष भगवान श्रीराम का जन्म ही समाज को सही दिशा दिखाने के लिए हुआ था। जन्म से लेकर अंत तक भगवान श्रीराम ने अपने प्रत्येक लीला में एक आदर्श स्थापित किया। अपनी सभ्यता, संस्कृति व सनातन धर्म की रक्षा के लिए उन्होने कईयों का विनाश किया। उनहोंने कहा कि आज के लोग बड़ों को प्रणाम करने से हिचकते हैं। जबकि बड़ो को प्रणाम करने से आयु, विद्या व बल में वृद्धि होती है।

Posted By: Jagran