गढ़वा: सदर अस्पताल में मरीजों के इलाज में लापरवाही सामान्य बात हो गई है। गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को अलग वार्ड में रखने के नियमों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को भर्ती कर अलग वार्ड में रखने के मामले में चिकित्सक से लेकर स्वास्थ्यकर्मी तक परवाह नहीं करते हैं। इसकी बानगी बुधवार को देखने को मिली, जब डेंगू के संदिग्ध मरीज को मेडिकल वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। उस वार्ड में कई अन्य मरीज भी इलाजरत हैं। इसकी जानकारी मीडियाकर्मियों के माध्यम से जिला मलेरिया सलाहकार को दी गई, तब मलेरिया विभाग समेत सदर अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों की तंद्रा भंग हुई। आनन फानन में अस्पताल के उपरी तल्ले में डेंगू पीड़ित मरीजों को रखने के बने वार्ड में उसे शिफ्ट किया गया।

- क्या है मामला :

रमना थान क्षेत्र के कर्णपुरा गांव के मानपुर टोला निवासी राम प्रवेश राम का पुत्र रंजीत कुमार रवि गुजरात के अहमदाबाद में प्राइवेट कंपनी में कार्य करता था। वह विगत 28 नवंबर को बीमार हालत में घर लौटा था। गुजरात में भी वह करीब 20 दिनों से बीमार था। 30 नवंबर की रात उसकी तबियत ज्यादा खराब हो गई। एक दिसंबर को उसे सदर अस्पताल में लाया गया। इमर्जेंसी में बैठे चिकित्सक ने उसे भर्ती कर इलाज शुरु किया। इस बीच टीबी की भी जांच कराई गई। 3 दिसंबर को रक्त में प्लेटलेट्स की जांच सदर अस्पताल स्थित मेडॉल लैब में कराई गई तो 1.06 लाख प्लेटलेट्स पाया गया, जो सामान्य से कम था। 4 दिसंबर को पुन: रक्त जांच में प्लेटलेट्स गिरकर एक लाख तक आ गया। इसके बावजूद भी उसे डेंगू के संदिग्ध मरीज के रुप अलग वार्ड में रखने की जरुरत नहीं समझा गया। उसे मच्छरदानी देने की भी जरुरत नहीं समझा गया। इस बीच इस मामले की जानकारी मीडियाकर्मियों के संज्ञान में आते ही मलेरिया विभाग सजग हुआ और रंजीत कुमार रवि को बुधवार के दोपहर के बाद अलग वार्ड में ले जाया गया। - पक्ष -

रंजीत कुमार रवि का रक्त का नमूना रिम्स रांची में जांच के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उसे डेंगू पीड़ित कहा जा सकता है। वैसे उसे अलग वार्ड में रखकर इलाज शुरु कर दिया गया है।

- डॉ एनके रजक, सिविल सर्जन, गढ़वा।

Posted By: Jagran

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