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संवाद सहयोगी, रामगढ़ : ईश्वर ने मानव जीवन प्रेम करने के लिए प्रदान किया है। रामायण महाभारत एवं अन्य शास्त्र भी हमें जोड़ना सिखाती है। संत भी समाज और राष्ट्र को एक सूत्र में जोड़कर मानव का उत्थान करने का काम करते हैं।

उक्त बातें मंगलवार को रामगढ़ के छोटी रणबहियार गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन मंगलवार को मथुरा के कथा व्यास राष्ट्रीय संत काष्णी बालयोगी ब्रह्मानंद ने प्रवचन करते हुए कही। रामायण में राम ने जो किया उसे सभी मनुष्य को करना चाहिए, वहीं गीता में श्रीकृष्ण ने जो ज्ञान दिया उसे सभी लोगों को अपनाना चाहिए। इससे ही जीवन सफल और सुफल हो सकता है। ईश्वर कभी धर्म, जाती एवं समुदाय में भेदभाव नहीं करते हैं। आज मानव में प्रेम की नहीं घृणा का भाव भर गया है। आज राष्ट्र, समाज, परिवार और व्यक्ति का जीवन संकट में है। ऐसे में भागवत कथा की परम आवश्यकता है जो मन के अभिमान, घृणा, काम, क्रोध, द्वेष भाव को समाप्त कर मन को शुद्व एवं साफ करता है। भगवान निर्मल मन से प्राप्त होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सबरी छोटी जाति की होते हुए भी भगवान से निश्छल प्रेम करती थी, जिसके कारण भगवान स्वयं उनके पास पहुंचे व सबरी को धन्य कर दिया। कपटी मन से कभी भी भगवान को प्राप्त नहीं किया जा सकता है। श्रोताओं से आग्रह किया कि सपरिवार भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। संगीतमय भागवत कथा में प्रतिदिन रात को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। वहीं कथा वाचक के साथ आए संगीत की टोली ने एक से बढ़कर एक भजन को प्रस्तुत कर श्रद्वालुओं को झूमने पर मजबूर कर दे रहे हैं।

Posted By: Jagran

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