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दुमका: SKMU में 13 निदेशकों की तैनाती पर छिड़ा विवाद, योग्यता और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल

Published: Tue, 01 Sep 2026 05:08 PM (IST)

सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय में नए अधिनियम के तहत 13 निदेशकों की नियुक्ति की गई है। इन नियुक्तियों में तय मापदंडों की अनदेखी और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय। (जागरण)

सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय। (जागरण)

HighLights

  1. एसकेएमयू में 13 निदेशकों की नियुक्ति पर विवाद।

  2. योग्यता और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे।

  3. वरिष्ठ शिक्षकों की अनदेखी, पारदर्शिता की कमी।

जागरण संवाददाता, दुमका। झारखंड के विश्वविद्यालयों में लागू नए अधिनियम के तहत सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय में सृजित पदों पर कुलपति प्रो. डॉ. कुनुल कंडीर के स्तर से पद के अनुरूप योग्यताधारी शिक्षकों को तैनात करने की प्रक्रिया शुरु करने के साथ ही इसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

अभी विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से महत्वपूर्ण निदेशालयों के संचालन के लिए 13 शिक्षकों को निदेशक के तौर पर तैनात करने की अधिसूचना जारी की गई है।

कुलपति प्रो. डॉ. कुनुल कंडीर ने झारखंड स्टेट यूनिवर्सिटीज एक्ट 2026 की धारा 22 से 38 के प्राविधानों के तहत इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है।

सभी निदेशकों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा और ये सभी अब अपने प्रशासनिक दायित्वों के साथ शैक्षणिक कार्य में भी सहभागिता तय करेंगे।

इन 13 शिक्षकों को बनाया गया है निदेशक

सिदो-कान्हु मुर्मू प्रबंधन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक पीजी अंग्रेजी विभाग के डा.अच्युत चेतन को रिसर्च, इनोवेशन, इन्क्यूबेशन, इंडस्ट्री लिंकेज एंड एंटरप्रेन्योरशिप का निदेशक बनाया गया है।

पीजी भौतिकी के डॉ. राजेश यादव को सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल लर्निंग, पीजी हिंदी के डॉ. विनय कुमार सिन्हा को लाइफ लांन्ग लर्निंग एंड एजुकेशन, पीजी जूलॉजी की डॉ. पूनम हेंब्रम को छात्र मामले, एसपी कॉलेज की डॉ. पूनम बिन्झा को एनएसएस, पीजी उर्दू के डॉ. एसटी खान को खेल एवं शारीरिक शिक्षा, पीजी जूलॉजी के डॉ. निलेश कुमार को आइक्यूएसी का निदेशक बनाया गया है।

इसके अलावा एसपी कॉलेज की डॉ. सुमित्रा हेंब्रम को समावेशी शिक्षा, पीजी समाजशास्त्र के डॉ. सुजीत कुमार सोरेन को इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप एंड प्लेसमेंट और पीजी भौतिकी के डॉ. राजीव रंजन सिन्हा को जनसंपर्क एवं सामुदायिक आउटरीच का निदेशक बनाया गया है।

पीजी अंग्रेजी की डॉ. अंजुला मुर्मू को छात्र कला एवं संस्कृति, पीजी अर्थशास्त्र के डॉ. राजीव केरकेट्टा को संबद्ध महाविद्यालयों का निदेशक नियुक्त किया गया है।

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सभी नवनियुक्त निदेशकों को अपने क्षेत्रों में प्रभावी तरीके से कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया है।

निदेशकों की तैनातगी में तय मापदंडों की अनदेखी पर उठे सवाल

सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नए विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत 13 निदेशकों की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय की ओर से जारी अधिसूचना में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 की धारा 22 से 38 का हवाला देते हुए सभी नियुक्तियां तीन वर्ष के लिए करने का हवाला दिया है।

हालांकि, निदेशकों की नियुक्ति के साथ ही विश्वविद्यालय के अंदर ही इन पदों के तय योग्यता व मापदंड के साथ चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक व्याख्याता ने कहा कि निदेशकों की नियुक्ति में तय मापदंडों की अनदेखी हुई है और तय मापदंडों की अहर्ता रखने वाले योग्य शिक्षकों की अनदेखी की गई है।

ऐसे शिक्षकों को निदेशक बनने के अवसर से वंचित किया है। उनके मुताबिक निदेशक बनाने के लिए एसोसिएट प्रोफेसर स्तर की योग्यता तय की गई है लेकिन कई ऐसे शिक्षकों को निदेशक बना दिया गया है जो सहायक प्राध्यापक की आहर्ता रखते हैं।

साथ ही इस पद के लिए योग्य शिक्षकों से आवेदन या अभिरुचि आमंत्रित किए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं यह भी स्पष्ट नहीं है। इतना ही नहीं तैनात कई निदेशकों को उनके संकायों से इतर ऐसे विभागों की जिम्मेवारी तय कर दी गई है जिसको लेकर चर्चा हो रही है।

आवेदन नहीं मांगने पर भी सवाल

इन नियुक्तियों को लेकर सबसे अधिक चर्चा चयन प्रक्रिया को लेकर है। विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों का कहना है कि निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति से पहले सभी योग्य शिक्षकों से आवेदन या अभिरुचि आमंत्रित की जानी चाहिए थी।

इससे योग्य और इच्छुक शिक्षकों को समान अवसर मिलता। आरोप है कि कई पदों पर आवेदन मांगे बिना ही सीधे नियुक्तियां कर दी गईं।

इससे यह सवाल उठ रहा है कि चयन का आधार क्या था और किन मानदंडों के आधार पर संबंधित शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई। हालांकि इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

दो अहम प्रशासनिक पदों के निदेशक भी हुए तैनात

एसकेएमयू प्रबंधन ने मंगलवार को वर्तमान डीएसडब्ल्यू डॉ. जैनेंद्र यादव को डीन एकेडमिक अफेयर्स तथा वर्तमान सीसीडीसी डॉ. अब्दुस सत्तार को डायरेक्टर स्टेट एंड फैसिलिटी मैनेजमेंट के पद पर तैनात करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

इन नियुक्तियों में विशेष रूप से डीन, एकेडमिक अफेयर्स के पद पर की गई नियुक्ति को लेकर आपत्ति सामने आ रही है। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस पद की निर्धारित पात्रता और नियमों को नजरअंदाज करते हुए नियुक्ति की है।

बताया जा रहा है कि डीन एकेडमिक अफेयर्स के पद पर प्रोफेसर रैंक के शिक्षक की नियुक्ति का प्राविधान है और विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रैंक के शिक्षक उपलब्ध हैं। इसके बावजूद प्रोफेसर रैंक के शिक्षक को नियुक्त न कर एसोसिएट प्रोफेसर रैंक के शिक्षक को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

वरिष्ठ शिक्षकों को अवसर नहीं मिलने की चर्चा

नियुक्तियों के बाद विश्वविद्यालय में यह चर्चा भी है कि कई वरिष्ठ शिक्षक निदेशक पद की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला।

विशेष रूप से 1996 बैच के कुछ शिक्षकों के बीच भी इसको लेकर असंतोष की चर्चा है। वहीं कुछ शिक्षकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में एक विशेष समूह का प्रभाव बढ़ गया है और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों में उसी के अनुसार फैसले लिए जा रहे हैं।

विश्वविद्यालय में विभिन्न निदेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित

  • अनुसंधान, नवाचार, इन्क्यूबेशन, उद्योग संपर्क एवं उद्यमिता निदेशक विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेंगे।
  • सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल लर्निंग निदेशक विश्वविद्यालय के सभी विभागों, परिसरों, अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों में तकनीकी ढांचे और डिजिटल पहलों की योजना बनाने, उन्हें लागू करने तथा प्रभावी प्रबंधन का कार्य करेंगे।
  • आजीवन शिक्षा एवं सतत अधिगम निदेशक आजीवन शिक्षा एवं सतत अधिगम से संबंधित गतिविधियों को संचालित करेंगे।
  • छात्र मामलों के निदेशक विद्यार्थियों से जुड़े कल्याणकारी, सह-पाठ्यक्रम, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं विस्तार गतिविधियों के समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
  • राष्ट्रीय सेवा योजना निदेशक विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों का समन्वय एवं पर्यवेक्षण करेंगे।
  • खेल एवं शारीरिक शिक्षा निदेशक विश्वविद्यालय के विभागों तथा महाविद्यालयों में खेल गतिविधियों व शारीरिक शिक्षा को बढ़ावा देंगे।
  • आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य करेंगे।
  • समावेशी शिक्षा निदेशक विश्वविद्यालय को समावेशी एवं भेदभाव रहित शैक्षणिक संस्थान बनाने के लिए कार्य करेंगे।
  • इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप एवं प्लेसमेंट निदेशक विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा उनके कौशल विकास, क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण से संबंधित गतिविधियों का समन्वय करेंगे।
  • जनसंपर्क एवं सामुदायिक आउटरीच निदेशक विश्वविद्यालय के आंतरिक एवं बाहरी संचार की जिम्मेदारी संभालेंगे।
  • छात्र कला एवं संस्कृति निदेशक विश्वविद्यालय में कला एवं संस्कृति से संबंधित गतिविधियों का संचालन एवं समन्वय करेंगे।
  • अंगीभूत महाविद्यालयों के निदेशक विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालयों के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक समन्वय की निगरानी करेंगे।
  • संबद्ध महाविद्यालयों के निदेशक विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के प्रशासन एवं समन्वय की निगरानी करेंगे।