रामगढ़ : झारखंड राज्य में कुपोषण एक चुनौती है। इसका समाधान सामूहिक प्रयास से एवं गांव में ग्रामीणों के बीच जागरूकता फैलाकर किया जा सकता है। उक्त बातें शुक्रवार को डांड़ो पंचायत अंतर्गत पदनीदुमा गांव में क्राई एवं साथी संस्था के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित माता समिति, किशोरी समूह एवं ग्रामीणों के बीच बैठक में संस्था के कालेश्वर मंडल ने कही। उन्होंने कहा कि जिस दिन हमारा समाज जागरूक होकर कुपोषण के खिलाफ लड़ाई प्रारंभ कर देगा उसी दिन राज्य से कुपोषण समाप्त हो जाएगा। जब मां के गर्भ में बच्चे की पहचान हो जाती है उसी समय से गर्भवती माता को खान-पान पर विशेष ध्यान देना होता है। बच्चा के जन्म होने पर उसे छह माह तक केवल मां का ही दूध दिया जाना चाहिए। छह माह के बाद मां के दूध के साथ-साथ बच्चे को उपरी आहार भी देना चाहिए। कुपोषण को दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर भी कई प्रकार की साग-सब्जियां पाई जाती है जिसकी पहचान कर उसे मां एवं बच्चे को अवश्य खिलाना चाहिए। सहिया साथी मीरू मुर्मू ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को केवल मां का पहला दूध दिया जाना चाहिए। मां का पहला दूध में काफी पौष्टिक होता है और इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चे का नियमित टीकाकरण एवं अनुश्रवण होते रहना चाहिए ताकि बच्चे का कुपोषण की स्थिति का पता चल पाए। सामाजिक कार्यकर्ता सोनावती हांसदा ने कहा कि कुपोषण को दूर करने के लिए अभियान की तरह काम करना होगा। तभी कुपोषण को दूर भगाया जा सकता है। इस दौरान आंगनबाड़ी सेविका, सहिया समेत अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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