संवाद सहयोगी, रामगढ़ : रामगढ़ प्रखंड में सरकारी योजनाओं का बुरा हाल है। प्रखंड में फिलहाल दो ऐसे मामले सामने आये हैं जिससे सिस्टम पर सवाल उठ रहा है। प्रखंड के मुर्गाीदुमा गांव में एक वृद्ध दंपती को पीएम आवास के लिए मिली राशि किसी ने उनके खाते से उड़ा ली तो धनौर गांव में सिंचाई कूप के लिए मिली राशि कुआं खोदने के लिए निकाल ली गई और कुआं अधूरा पड़ा है। न तो कुआं से पानी निकला और न ही आवास की नींव खोदी जा रही, लेकिन योजना की राशि खाते से निकल गई। इन मामलों में शिकायत के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रखंड के नौखेता पंचायत के मुर्गीदुमा गांव की फूलो देवी को वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री आवास बनाने की स्वीकृति मिली। प्रखंड कार्यालय से 18 दिसंबर 20 को उसके नाम से भारतीय स्टेट बैंक शाखा में 40 हजार रुपया का अग्रिम भुगतान किया गया। फूलो के अनुसार खाता में सिंदुरिया गांव का एक युवक मनरेगा की राशि भेजता है। उसी युवक ने राशि निकासी के लिए कई बार मशीन में अंगूठा लगवाया। खाता से इस साल 21 जनवरी को दो हजार, 22 जनवरी, 29 जनवरी व एक फरवरी को दस-दस हजार की निकासी कर ली गई। इसके बाद आठ फरवरी को पांच और 18 फरवरी को दो हजार मिलाकर कुल 39 हजार रुपया की निकासी कर ली गई है। मार्च में वह अपना आवास बनाने के लिए पैसा निकालने गई, तब पता चला कि उसके खाता से सभी पैसा की निकासी पूर्व में कर ली गई है।

फूलो ने बताया कि उसने पैसे की निकासी नहीं की है। उसने इसकी शिकायत प्रखंड विकास पदाधिकारी अमल जी से भी की। बीडीओ के पास मामला नहीं सुलझा तो थाना में भी शिकायत की। फूलो ने बताया कि पैसा निकासी के लिए सिंदुरिया गांव के ही एक युवक ने मशीन में अंगूठा लगाया है। इसके बाद कहीं पर भी अंगूठा नहीं लगाया है।

रामगढ़ थाना पुलिस ने युवक से पूछताछ की लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। पुलिस ने फूलो को बैंक का स्टेटमेंट लाने को कहा है। आखिर गरीब की राशि किसने हड़प ली। ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों इस प्रकार की घटनाएं खूब हो रही हैं। अधिकांश मामला का खुलासा होने पर पैसा वापस कर दिया जाता है। बहरहाल दंपती राशि के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं।

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सिचाई कूप खुदा नहीं, निकाल ली राशि

रामगढ़ : रामगढ़ प्रखंड में मनरेगा कानून के तहत संचालित योजना में एक और अनियमितता सामने आई है। सिचाई कूप की थोड़ी खुदाई कर संबंधित रोजगार सेवक एवं कनीय अभियंता ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए योजना में सामग्री मद से 87280 रुपये की निकासी कर ली है। इसके बदले न तो योजना स्थल पर सामग्री उपलब्ध गई है और ना ही कूप में सामग्री का उपयोग किया गया। बड़ी रणबहियार पंचायत के धनौर गांव के पतेश्वर मांझी के नाम से वित्तीय वर्ष 2018-19 में 3.40 लाख रुपये से एक सिचाई कूप बनाने की स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें 1.71696 लाख मजदूरी मद में एवं 1.68304 लाख सामग्री मद में खर्च की जानी थी। पतेश्वर स्थायी रूप से इसी पंचायत के ईटबंधा गांव में रहता है लेकिन उनकी जमीन धनौर गांव में भी रहने के कारण कूप बनाया जा रहा है। 23 फरवरी 18 को प्रशासनिक स्वीकृति मिली। पतेश्वर के कूप का निर्माण छह अप्रैल 19 से प्रारंभ हुआ। योजना में इसी दिन से लेकर 19 अप्रैल तक तक दो मास्टर रोल के जरिए मजदूरी मद में 18468 रुपया की निकासी की गई है। मास्टर रोल संख्या 896 के जरिए सात मजदूरों को 84 दिन काम दिया गया। इसके बदले 14364 रुपये की निकासी की गई है। वहीं मास्टर रोल संख्या 897 के जरिए केवल दो मजदूरों को 25 दिन मजदूरी प्रदान की गई है और बदले 4104 रुपये की निकासी की गई है। इस योजना में मजदूरी मद में कुल 18464 रुपये की ही निकासी की गई है।

एक कनीय अभियंता से मिली जानकारी के अनुसार इतनी राशि में सात से आठ फीट की मिट्टी खुदाई की जा सकती है। जबतक सिचाई कूप की खुदाई पूरी नहीं हो जाती है, तबतक सामग्री मद में राशि नहीं निकाली जा सकती है। यदि सिचाई कूप खुदाई के दौरान 20-25 फीट में पानी निकल जाता है तो इस परिस्थिति में अविलंब सामग्री उपलब्ध करवाकर कूप को पूर्ण कराया जाता है, इसके बाद भुगतान किया जा सकता है। संबंधित रोजगार सेवक एवं कनीय अभियंता ने सात से आठ फीट सिचाई कूप खुदाई में ही सामग्री मद में 87280 रुपये की निकासी कर ली। कूप में 19 अप्रैल 19 के बाद से आजतक मजदूरों ने काम नहीं किया। एक वर्ष बाद 13 मार्च 20 को सामग्री मद में बिल नंबर 144 से 87280 रुपये की निकासी वेंडर सुबोध कुमार साह के माध्यम से की गई है। अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रखंड विकास पदाधिकारी अमल जी ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। जांच कराने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Jagran