यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 03, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
विभागीय उदासीनता से हो रहा पत्थरों का अवैध उत्खनन
विभागीय मिलीभगत से थाना क्षेत्र के ढोल कट्टा पहाड़ आमचुआं कौडीगढ़ शहरपुर सालबोना पोखरिया पोड़ा बसडिया ताराचुआं व चिरापाथर सहित ...और पढ़ें

संवाद सहयोगी, शिकारीपाड़ा : विभागीय मिलीभगत से थाना क्षेत्र के ढोल कट्टा पहाड़, आमचुआं कौडीगढ़, शहरपुर, सालबोना पोखरिया, पोड़ा बसडिया, ताराचुआं व चिरापाथर सहित दर्जनों मौजा में पत्थर का अवैध खनन व परिवहन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन की लाख कोशिश के बाद भी इसे रोक पाना विभाग के बस की बात नहीं है। समय-समय पर खनन एवं राजस्व विभाग दिखावे के लिए छापेमारी करता है लेकिन हासिल कुछ भी नहीं होता है। अधिकारी निरीक्षण करने के नाम पर खानापूर्ति करके लौट आते हैं। जिला खनन पदाधिकारी दिलीप कुमार तांती व अंचलाधिकारी अमृता कुमारी ने बुधवार को अवैध खनन की जांच करने के लिए पहुंचे तब खदानें बंद थी लेकिन पत्थर खनन के उपकरण खदानों में मौजूद थे, लेकिन अधिकारियों ने उपकरण को जब्त करना जरूरी नहीं समझा। जांच के बाद इतना कहा गया कि अभी अवैध पत्थर खनन कार्यों की पहचान की जा रही है, जबकि क्षेत्र में 400 से अधिक अवैध पत्थर खदानें नियम एवं कानून को ताक पर रख चल रही हैं। पत्थर खनन के कारण गोचर भूमि का अस्तित्व ही समाप्त हो रहा है। पत्थर माफिया भोले भाले आदिवासी रैयत की भूमि नाममात्र की कीमत देकर लेते हैं और बिना अनुज्ञप्ति लिए ही खनन कार्य शुरू कर देते हैं। वर्जन
राजस्व कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक से जांच कराई जा रही है। जांच प्रतिवेदन आने के पश्चात अवैध पत्थर उत्खनन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
अमृता केशरी सीओ, शिकारीपाड़ा वर्जन
जिला में एक भी खान निरीक्षक नहीं रहने के कारण कार्य में कठिनाई हो रही है जितना संभव हो रहा है उसकी जांच कर कार्रवाई की जा रही है।
दिलीप कुमार तांती, खनन पदाधिकारी दुमका वर्जन
अवैध खनन पर रोकना खनन विभाग एवं राजस्व विभाग का काम है। पुलिस को केवल सहयोग करना है। पुलिस सहयोग देने के लिए हमेशा तैयार है।
संजय सुमन, थाना प्रभारी, शिकारीपाड़ा थाना
