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असम और पश्चिम बंगाल चुनाव में झामुमो की भूमिका पर हेमंत सोरेन ने दिया जवाब, गुरुजी के सपनों को साकार करने पर जोर

By Rajeev Ranjan Edited By: Mritunjay Pathak
Published: Tue, 03 Feb 2026 07:14 PM (IST)

Hemant Sorenः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में झामुमो की भागीदारी पर जवाब ...और पढ़ें

दुमका हवाईअड्डा पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पिंटू सिन्हा।

दुमका हवाईअड्डा पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पिंटू सिन्हा।

HighLights

  1. झामुमो की असम-बंगाल चुनाव में भागीदारी पर निर्णय पार्टी लेगी।

  2. हेमंत सोरेन ने आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष जारी रखने को कहा।

  3. दुमका में मीडिया से बात करते हुए शिबू सोरेन के सपनों का जिक्र।

राजीव, जागरण, दुमका। CM Hemant Soren: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंंत सोरेन हाल ही में असम गए थे। वहां पर मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव है। असम के साथ ही झारखंड के पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव होना है। पश्चिम बंगाल में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रभाव रहा है। चुनाव भी लड़ता रहा है।

क्या झारखंड की सत्ताधारी पार्टी-झामुमो असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव लड़ेगा? इस सवाल का जवाब झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष व झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया है। सोरेन ने कहा  है-यह तो आने वाले समय में पार्टी स्तर पर तय होगी लेकिन एक बात तो तय है कि आदिवासियों के हक व अधिकार के लिए झामुमो सदैव संघर्ष करता रहा है और आगे भी करेगा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची जाने के क्रम में मंगलवार को दुमका हवाईअड्डा पर मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा-गुरुजी ( दिवंगत शिबू सोरेन) के वृहत झारखंड के सपनों को साकार किया जाएगा। गुरुजी सदैव देश के उन क्षेत्रों के आदिवासियों से जुड़े थे जहां इनकी आबादी है। कहा कि देश के इन हिस्सों में रहने वाले जनजातीय समाज के लोग भी झामुमो परिवार को जानते हैं।

हेमंत सोरेन ने कहा कि तकरीबन 150 साल पूर्व झारखंड और ओड़िशा से आदिवासियों को अंग्रेज असम के चाय बागान में काम कराने के लिए लेकर गए थे। दुर्भाग्य यह कि आज भी वे लोग अपनी पहचान, अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। वहां रहने वाले आदिवासियों को आदिवासियों का अधिकार और दर्जा नहीं मिला है।

वहीं दाओस यात्रा के अनुभवों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस यात्रा का परिणाम आने वाले समय में जरूर दिखेगा लेकिन इतने बड़े वैश्विक मंच पर अगर झारखंड के संदर्भों को पहले पहुंचाया जाता तो शायद यहां की तस्वीर कुछ अलग होती।