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दुमका में NUPPL के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन, कोयला खदान का काम ठप

Published: Mon, 14 Sep 2026 07:08 PM (IST)

NUPPL Coal Mine Protest: दुमका के गोपीकांदर प्रखंड में नवेली उत्तर प्रदेश पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड (एनयूपीपीएल) के खिलाफ ग्रामीणों ने चक्का जाम किया।

NUPPL Coal Mine Protest: खदान के बाहर विरोध प्रदर्शन करते आदिवासी-मूलवासी। (फोटो जागरण)

NUPPL Coal Mine Protest: खदान के बाहर विरोध प्रदर्शन करते आदिवासी-मूलवासी। (फोटो जागरण)

HighLights

  1. गोपीकांदर में नवेली कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का चक्का जाम।

  2. मुआवजे और जनसुनवाई न होने पर ग्रामीणों ने जताया विरोध।

  3. खनन कार्य और वाहनों का परिचालन दिनभर रहा प्रभावित।

संवाद सूत्र, गोपीकांदर(दुमका)। झारखंड के दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड की ओड़मो पंचायत में कोल कंपनी Neyveli Uttar Pradesh Power Project Limited (NUPPL) को सोमवार को स्थानीय ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा।

आदिवासी-मूलवासी प्रभावित संघर्ष समिति के आह्वान पर ग्रामीणों ने जंगलटोला में चक्का जाम कर दिया। इसके कारण खदान क्षेत्र में दिनभर वाहनों का परिचालन और उत्खनन कार्य प्रभावित रहा।जंगलटोला में सैकड़ों ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ खदान की ओर जाने वाले मार्ग पर जुटे रहे।

ग्रामीणों ने कंपनी के पदाधिकारियों के वाहनों, विस्फोटक वाहन समेत अन्य वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें वापस लौटा दिया। समिति के सोकोल मरांडी ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर कंपनी प्रबंधन से लेकर अंचल अधिकारी और उपायुक्त तक को कई बार ज्ञापन दिया गया है, लेकिन अब तक समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी मनमाने तरीके से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक से प्रभावित ग्रामीणों के साथ कंपनी के अधिकारियों को जनसुनवाई कर समस्याओं का समाधान करना चाहिए। मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीण खदान में उतरकर अनिश्चितकाल के लिए खनन कार्य बंद कराने को बाध्य होंगे।

मुआवजे की मांग पर कुंडापहाड़ी में भी रोके हाइवा

इधर, कुंडापहाड़ी में विस्थापित होने वाले करीब 50 आदिम जनजाति पहाड़िया परिवारों ने भी मुआवजे की मांग को लेकर खनन कार्य में लगे हाइवा समेत अन्य वाहनों को रोक दिया।

मंगल देहरी ने कहा कि कुंडापहाड़ी के पहाड़िया परिवारों की जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है, लेकिन अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है। उनका कहना है कि अन्य गांवों के प्रभावित परिवारों के खातों में मुआवजे की राशि भेजी गई है, जबकि कुंडापहाड़ी के परिवार अब भी भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

गणेश देहरी ने आरोप लगाया कि सर्वे के दौरान प्रत्येक आवास के लिए 24 लाख सात हजार रुपये मुआवजा देने की बात कही गई थी। बाद में मुआवजे की राशि को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामसभा के माध्यम से मुआवजे की राशि घटाकर करीब छह लाख रुपये किए जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मुआवजे के मामले का समाधान होने तक खनन कार्य चलने नहीं दिया जाएगा।

विरोध-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण मौजूद रहे। दोनों स्थानों पर ग्रामीणों के आंदोलन के कारण सोमवार को खदान क्षेत्र में वाहनों का परिचालन और कोयला उत्खनन कार्य प्रभावित रहा। इस दौरान में समिति के सचिव रायसेन मुर्मू, कोषाध्यक्ष मंगल टुडू, उप सचिव रमेश सोरेन, उपाध्यक्ष लखीराम राय मदन राय सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।

नियमानुसार कोयला खदान शुरू होने से पहले प्रभावित क्षेत्र के गांवों के सभी ग्रामीणों के बीच जनसुनवाई होनी चाहिए थी जो कि ऐसा नहीं हुआ है,हमारे पड़ोस के गांव में बिना हमारे सहमति और बिना जनसुनवाई के कोयला खदान का कार्य चुपचाप चलाया जा रहा है।

 

प्रभावित गांवों के पर्यावरण, स्वास्थ्य ,एवं पीने का स्वच्छ पानी और प्रभावित क्षेत्र के लोगों को मिलने वाले उचित मुवावजा,रोजगार और विस्थापित नीति को लेकर कंपनी को पारदर्शिता के लिए जनसुनवाई करनी चाहिए।अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है तो यह जाम निश्चिंत कल तक जारी रहेगा।

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राजदीप मुर्मू, आदिवासी मूलवासी समिति कोषाध्यक्ष।

हमारी मांग केवल नवेली कंपनी प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ जनसुनवाई का है। इस विषय को लेकर स्थानीय प्रशासन , जिला उपायुक्त तक लिखित आवेदन के माध्यम से ज्ञापन दे चुके हैं। कोई संज्ञान में नहीं लिए इस लिए हमलोग शांति पूर्वक जाम का आह्वाहन किए हैं।

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सकल मरांडी, सलाहकार आदिवासी मूलवासी समिति।