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सिर्फ स्वाद नहीं, अब पर्सनालिटी और इमोशन की भाषा बनी चॉकलेट; जानिए दुमका के बाजार और डॉक्टरों की राय

By RajeevEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Sun, 13 Sep 2026 05:24 AM (IST)

दुमका में चॉकलेट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ मासिक 5-6 करोड़ का कारोबार होता है और यह ...और पढ़ें

फिल्मों, विज्ञापनों और बदलती जीवनशैली ने चॉकलेट को एक नया सामाजिक आयाम दिया है।

फिल्मों, विज्ञापनों और बदलती जीवनशैली ने चॉकलेट को एक नया सामाजिक आयाम दिया है।

HighLights

  1. दुमका में चॉकलेट का मासिक कारोबार 5-6 करोड़ रुपये।

  2. चॉकलेट अब खुशी और भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम।

  3. डॉक्टरों ने संतुलित सेवन और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह दी।

राजीव, दुमका।  हाथ में चॉकलेट और चेहरे पर मुस्कान... समय बदलने के साथ चॉकलेट सिर्फ बच्चों के खाने की चीज नहीं रही, बल्कि यह खुशी, दोस्ती और प्यार के इजहार का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुकी है। 
 
फिल्मों, विज्ञापनों और बदलती जीवनशैली ने चॉकलेट को एक नया सामाजिक आयाम दिया है। इसी ट्रेंड से निकला चॉकलेटी बॉय शब्द अब केवल खानपान की पसंद तक सीमित नहीं है।
 
बल्कि यह युवाओं के सलीकेदार पहनावे, साफ-सुथरे लुक, मधुर बोलचाल और आकर्षक व्यक्तित्व का प्रतीक बन चुका है। आज इसका मतलब सिर्फ सुंदर चेहरा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और बेहतर सामाजिक व्यवहार भी है।
 

भावनाएं जताने की नई भाषा और बाजार का नया ट्रेंड

चॉकलेट का रिश्ता अब केवल स्वाद से नहीं जुड़ा है। जन्मदिन, दोस्ती का दिन या कोई भी खास मौका हो, भावनाएं व्यक्त करने के लिए चॉकलेट गिफ्ट करना एक ट्रेंड बन चुका है। 
 
पारंपरिक मिठाइयों के मुकाबले चॉकलेट के आकर्षक गिफ्ट पैक ने अपनी एक अलग जगह बना ली है। बाजार में बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए अलग-अलग उत्पाद उपलब्ध हैं। 
 
₹1 के छोटे 'लेमनचूस' या टॉफी पैक से लेकर ₹1000 तक के प्रीमियम गिफ्ट पैक की भारी मांग है। ऑनलाइन शॉपिंग और छोटे पॉकेट-फ्रेंडली पैक्स ने इसकी पहुंच को और आसान बना दिया है।
 

दुमका में हर महीने 5 से 6 करोड़ का कारोबार

दुमका के स्थानीय वितरकों के अनुसार, जिले में चॉकलेट का बाजार तेजी से बड़ा रूप ले चुका है:

  •     मासिक बिक्री: दुमका में प्रति माह लगभग 5 से 6 करोड़ रुपये की चॉकलेट का कारोबार होता है।
  •     टॉप ब्रांड्स: बाजार में सबसे अधिक मांग कैडबरी (Cadbury) और अमूल (Amul) ब्रांड की है।
  •     पसंद का ट्रेंड: बच्चों के बीच अल्पैनलिबे और डेयरी मिल्क लोकप्रिय हैं, जबकि युवाओं और बड़ों में सिल्क और डार्क चॉकलेट पहली पसंद बनी हुई है।


ब्रांड वितरकों की राय

  •     अजीत दारुका (वितरक, अमूल ब्रांड, दुमका): दुमका बाजार में ₹1 से लेकर ₹1000 तक की चॉकलेट की मांग है। बच्चों में टॉफी-कैंडी तो वहीं बड़ों में अब हेल्थ कॉन्शियस होने के कारण डार्क चॉकलेट की मांग बढ़ रही है।
  •     गौरव दारुका (वितरक, कैडबरी ब्रांड, दुमका): डेयरी मिल्क और सिल्क के अलावा प्रीमियम रेंज और गिफ्ट पैक्स की मांग खास मौकों और त्योहारों पर काफी बढ़ जाती है।


स्वाद की मिठास और सेहत का गणित

चॉकलेट की लोकप्रियता के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता भी बेहद जरूरी है। दुमका के प्रमुख डॉक्टरों ने इसके संतुलित सेवन की सलाह दी है:
 

1. कैविटी और दांतों की सुरक्षा

    डॉ. श्वेता स्वराज (दंत चिकित्सक, फूलोझानो मेडिकल कॉलेज व अस्पताल): मीठे खाद्य पदार्थों का बार-बार सेवन दांतों में कैविटी (सड़न) का जोखिम बढ़ाता है। बच्चों के आहार में फल, दालें और पौष्टिक चीजें प्राथमिकता होनी चाहिए। मीठा खाने के बाद मुंह और दांतों की अच्छी सफाई बेहद जरूरी है।

2. कोको, कैलोरी और फैट का संतुलन

    डॉ. अंकिता सिंह (महिला रोग विशेषज्ञ, द होप हॉस्पिटल): चॉकलेट खरीदते समय रैपर पर कोको, चीनी, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी जरूर देखें। अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनॉयड्स होते हैं जो हृदय के लिए अच्छे माने जाते हैं, लेकिन ज्यादा चीनी और वसा वजन बढ़ा सकती है। सीमित सेवन ही सबसे सही रास्ता है।

3. बच्चों में लत और पौष्टिक भोजन से दूरी

    डॉ. संजय कुमार दास (शिशु रोग विशेषज्ञ, फूलोझानो मेडिकल कॉलेज): माता-पिता अक्सर रोने पर या अच्छे अंक आने पर बच्चे को चॉकलेट देते हैं। जब यह रोजाना की मांग बन जाती है, तो बच्चे दूध, फल और दाल जैसी पौष्टिक चीजें छोड़ देते हैं, जो चिंता का विषय है।

कुछ मीठा हो जाए का नारा आज लोगों के दिलों-दिमाग में रच-बस गया है। हालांकि, स्वाद और गिफ्टिंग कल्चर के इस दौर में चॉकलेट खरीदते समय सामग्री की सही जानकारी रखना और इसका सीमित व संतुलित सेवन करना ही सेहतमंद रहने की कुंजी है।