दुमका : सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई संताल परगना कॉलेज दुमका के मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र की ओर से गुरुवार को मोबाइल एडिक्शन इन यूथ विषय पर मनोविज्ञान विभाग में एक दिवसीय विभागीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्र के निदेशक सह विभाग के शिक्षक डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं में मोबाइल का इस्तेमाल एक नशा से कम नहीं है। 21 वीं सदी के वैज्ञानिक युग में मोबाइल की खोज एक आवश्यकता पूíत के रूप में की गई जिसमें मानव समुदाय अपनी तात्कालिक जरुरतों को समय सीमा के बीच प्राप्त कर सकें।

घर बैठे दुनिया की जानकारी हासिल कर लें यानि समय की देरी की जानकारी के तनाव से न केवल उन्हें राहत मिले बल्कि अपने सगे-संबंधियों का ख्याल व खैरियत जान सकें। इसके अलावा मोबाइल को अपने अनुसार जब चाहा जैसे चाहा जरुरत के अनुसार इस्तेमाल भी करें। मगर यह बात तब तक ही अच्छी लगती है जब तक मोबाइल हमारे अधीन है यानि मोबाइल को अपनी मर्जी के मुताबिक चला रहे हैं। लेकिन जो बातें समाने आ रही है उसके मुताबिक मोबाइल को युवा नहीं बल्कि युवाओं को मोबाइल ही चला रहा है। जहां मोबाइल से जरुरत भर की काम के निपटारे होने की बात होनी थी वह सीमा लांघती दिखती है। मोबाइल के उपयोग की शुरूआती अभिरुचि ने ना केवल उन्हें शनै: शनै: आदत के गिरफ्त में ले जा धकेला है बल्कि उन्हें इस कदर अपने पर आश्रित बना दिया है कि बिना उसके दिन की शुरुआत ही नहीं होती है। आलम यह कि पास में पैसा व जरूरत की बातें रहे या ना रहे स्मार्ट फोन रहना चाहिए।

बढ़ते मोबाइल के प्रयोग ने ना केवल उन्हें दुनिया से बेखबर व सामाजिक पलायन की ओर ले जाकर एकांतपन का बोध करा रहा है बल्कि इसके इस अति व्यवहार ने अब तक कितनों की जान भी ले ली है। डॉ. विनोद ने कहा कि युवाओं को मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता से बचने की जरूरत है। अभिभावकों को भी इस दिशा में सक्रिय पहल करने की आवश्यकता है जिससे उनके बच्चे इसके चंगुल में फंसकर शैक्षणिक जीवन को बर्बाद नहीं कर ले। इस अवसर पर विभाग के कई छात्र व छात्राएं उपस्थित थे।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस