दुमका : अपनी मांग को मनमाने के लिए जिले के 37 सौ पारा शिक्षक रांची में होनेवाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जिले से कूचकर गए हैं। अगर रांची में बात नहीं बनी तो सभी हड़ताल पर जा सकते हैं। एक दिन के लिए सभी के बाहर जाने के कारण गुरुवार को अधिकांश स्कूल में पढ़ाई ठप हो गई। शिक्षा विभाग तभी कार्रवाई करेगा, जब सरकार से आदेश आएगा।

दरअसल जिले के पारा शिक्षक कई माह से आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहे हैं। सभी ने एक स्वर में रांची में होनेवाले स्थापना दिवस के कार्यक्रम का विरोध करने के साथ आंदोलन का आगाज किया था। पुलिस ने बुधवार की देर शाम पारा शिक्षक के नेता संतोष पंडित को थाना में बैठाए रखा और देर रात उसे छोड़ दिया। पारा शिक्षकों के अचानक जिले से बाहर चले जाने के कारण उन स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई जो केवल उन पर निर्भर थी। इधर जामा से 264 पारा शिक्षकों के चले जाने से प्रखंड के लगभग 105 विद्यालय का पढ़न-पठान बाधित रहा। सभी पारा शिक्षक फिलहाल एक दिन के सामूहिक अवकाश पर हैं। लेकिन रांची के घटना के बाद यह लंबे समय के लिए भी हड़ताल में तब्दील हो सकती है। पारा शिक्षक लंबे समय से अपनी मांगों के समर्थन में लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं काठीकुंड के 272 पारा शिक्षक के सामूहिक अवकाश पर चले जाने के कारण प्रखंड के कई विद्यालयों में पठन-पाठन पूरी तरह बाधित रहा। संघ के सदस्य मनीष ने बताया कि प्रखंड के सभी पारा शिक्षकों को सामूहिक अवकाश में रहने के लिए निर्देश दिया गया था। 181 विद्यालय में पारा शिक्षक कार्यरत हैं।

गोपीकांदर प्रखंड के 181 पारा शिक्षक अवकाश में रहने पर विद्यालय में पढ़ाई ठप रही।

जिला शिक्षा अधीक्षक मारिया गैरोतो तिर्की ने बताया कि अभी तक पारा शिक्षकों ने एक दिन के अवकाश के लिए आवेदन दिया है। हड़ताल पर जाने की अभी तक जानकारी नहीं है। अगर हड़ताल पर जाते हैं तो सरकार का आदेश मिलने के बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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