धनबाद, जेएनएन। Varchasva बॉलीवुड में ग्रामीण अंचल की पृष्ठभूमि में अपराध और दबंग माफिया की कहानियों ने फ़िल्म मेकर्स को बहुत आकर्षित किया है। गैंग्स ऑफ वासेपुर,  मिर्ज़ापुर,  रक्तांचल को दर्शकों ने बहुत सराहा है। अब निर्देशक मनीष सिंह झारखंड के धनबाद जिले पर कोयले की खान के व्यवसाय में माफिया ताकत और गुटबाज़ी पर आधारित फ़िल्म 'वर्चस्व एन एब्सोल्यूट पावर का निर्देशन करेंगे। कुर्ज़ी प्रोडक्शन के बैनर तले फ़िल्म वर्चस्व एन ऐब्सलूट पावर का निर्माण किया जा रहा है। फ़िल्म के निर्माता हुसैन कुर्ज़ी हैं। फ़िल्म मेकर्स ने फ़िल्म का टीज़र पोस्टर लाँच कर दिया है जो बहुत ही दिलचस्प लग रहा हैं जिसमें फ़िल्म के मुख्य नायक ने कोयला खदानों में काम में आने वाला बेलचा कंधे पर रखा है। फ़िल्म की कहानी राजेश एम शर्मा ने लिखी है। इसकी शूटिंग झारखंड के धनबाद ज़िले में स्थित कोयला खदानों के रियल लोकेशंस पर की जाएगी।

धनबाद की सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानी 

फ़िल्म की कहानी 90 के दशक में कोयला खदानों, वास्तविक किरदारों और घटनाओं से प्रेरित है। इसलिए फ़िल्ममेकर्स अभी फ़िल्म के मुख्य कलाकारों के बारे में अधिक जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं। फ़िल्म के एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर जितेन्द्र कुमार सिंह हैं। आज़ादी की पहले से ही इस लड़ाई में धनबाद लहुलुहान होता आया है। वर्चस्व की लड़ाई में पिछले 20 साल से राज करने वाला अमरेश सिंह पैसे के साथ पावर कमाना भी जानता है। वह धनबाद का एमएलए है। ईमानदारी और मेहनत के रास्ते पर चलने वाला युवा अजय कोयला खदानों के माफिया सरग़ना के द्वारा मज़दूरो और औरतों के ख़िलाफ़ हो रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है। मज़दूरों में अजय के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए अमरेश सिंह अपने कोयला खदानों का मुखिया बना देता है। अजय के बढ़ते वर्चस्व और अमरेश सिंह में टकराव तय है। युवा अजय गरीब और ज़रूरतमंद लोगों का हीरो है तो मीडिया ने उसे दबंग डॉन की इमेज दी है। अजय का बेटा अपने पिता के मूल्यों के ख़िलाफ़ है। इस वर्चस्व की इस लड़ाई में अमरेश सिंह और अजय आमने सामने हैं तो बाप बेटे का रिश्ता भी दाव पर है।

लॉकडाउन खत्म होने के बाद शुरू होगी शूटिंग 

युवा निर्देशक मनीष बताते हैं वर्चस्व कहानी 90 के दशक में धनबाद के कोयला खान पर क़ब्ज़े और दबदबे की कहानी है। कोयला माफिया के सरग़ना इन कोयला खानों पर आधिपत्य की लड़ाई को वर्चस्व की लड़ाई बना लेते हैं। बहुत लम्बे समय के बाद बॉलीवुड को एक ऐसा नायक मिलेगा जो गरीब और मज़दूर का मसीहा बनकर सामने आता है। सही और ग़लत रास्तों से चलकर अजय पावर की जिस कुर्सी पर  आज बैठा है उसे पाने के लिए कोई कुछ भी कर सकता है। वर्चस्व की इस लड़ाई में बहुत कुछ कल्पना से परे होने वाला है, खून की नदियों में रिश्तों का खून बहाना तय है। फ़िल्म वर्चस्व की शूटिंग लॉकडाउन के ख़त्म होते ही शुरू होगी और अगले साल शुरू में यह सिनेमागृहो में प्रदर्शित होगी।