जागरण संवाददाता, धनबाद : सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गरीबों के कल्याण के लिए नित नई कल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत करते हुए लंबी लंबी बातें करते हैं। लेकिन इन याेजनाओं का लाभ सरकारी बाबूओं की लालफीताशाही के कारण गरीबों को नहीं मिल पा रहा।

इसके लिए भी गरीबों को अपनी जेंबें ढ़ीली करनी पड़ती हैं। जिसने बाबूओं का ख्याल रखा, बाबूओं ने भी उनको लाभ देने में अपना दिल खोल दिया। लेकिन जिसने उनकी हथेलियों को गरम नहीं किया, उसको महीनों दौड़ाने के बाद भी हक मयस्सर नहीं हुआ। भले ही सारी कागजी खानापूर्ति आवेदकों ने पूरी कर रखी हो।

ये हम नहीं कह रहे। बल्कि पिछले डेढ़ साल से प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक की चक्कर लगा कर थक चुकी स्व पार्थ दां की बेवा बबीता कह रही है। समाहरणालय में न्याय पाने की उम्मीद से पहुंची बबीता को एक बार फिर से निराशा हाथ लगी, जब संबंधित अधिकारी ने उससे प्रखंड कार्यालय में जाकर आवेदन देने को कहा। बबीता ने बताया कि लगभग दो साल पहले पति की मौत के बाद उसने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर के लिए आवेदन किया था। जिसकी संस्तुति पंचायत स्तर से अनुमोदित होकर प्रखंड कार्यालय को भी उपलब्ध करा दी गई। लेकिन आज तक उसे इसका लाभ नहीं मिल सका है।

प्रोग्राम कोआर्डिनेटर शिवशंकर पर पांच हजार रुपये घूस मांगने का आरोप लगाते हुए वह कहती है कि उसके बाद कई लोगों को योजना का लाभ मिल चुका। लेकिन उसने कोआर्डिनेटर की मांग को पुरा नहीं किया, लिहाजा उसे अभी भी कार्यालयों को चक्कर काटना पड़ रहा है। वहीं पति की मौत के बाद वह किसी तरह दो बच्चों का पेट पाल रही है। पैसे के अभाव में मिट्टी का बना उसका घर पिछले बरसात में ही ढह गया।

इस बाबत पूछे जाने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी यास्मिता सिंह ने कहा कि घूस मांगे जाने की बात पुरी तरह से निराधार है। बबीता का चयन प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना के लिए किया गया है। सूची में उसका नाम 126 नंबर पर है। बारी आने पर उपलब्ध करा दिया जाएगा। लेकिन कब तक, इस सवाल पर वह चुप्पी साध लेती हैं।

Edited By: Atul Singh