संवाद सहयोगी, कतरास : रविवार का दिन कतरास कोयलांचल के लिए खास रहा। यहां श्री गंगा गोशाला में चल रहे गोपाष्टमी शताब्दी महोत्सव के छठे दिन वृषोत्सव पर धूमधाम से नंदी की बारात निकाली गई। श्रद्धालु बाजा-गाजा के साथ नाचते गाते गोमाता का जयकारा लगाते विवाहस्थल पर पहुंचे। इधर नंदिनी को सजा कर कार्यक्रम स्थल पर लाया गया। दरवाजे पर शहनाई बज रही थी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों का पूजन किया गया। दर्जन भर पंडितों ने मंत्रोच्चारण के बीच बाछा-बछिया का विवाह संपन्न कराया। कोलकाता के मशहूर व्यवसायी बृजमोहन गड़ोदिया और उनकी धर्मपत्नी नीरा गड़ोदिया यजमान थे। गिरिडीह की साध्वी सहित दर्जनों गो भक्त इस पुनीत कार्य की साक्षी बने। शादी के बाद हवन हुआ। आचार्य हरिनारायण ने कहा कि सनातन धर्म में बाछा-बछिया के विवाह का विशिष्ट फल वर्णित है। एक हजार गोदान के बराबर एक जोड़ा बाछा-बाछी के विवाह का फल प्राप्त होता है। प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र अग्रवाल, सचिव महेश अग्रवाल, मनोज कुमार ¨सघल, दीपक अग्रवाल, डीएन चौधरी, ओम प्रकाश हेलिवाल, गो¨बद हेलिवाल, पुष्कर डोकानियां, अजय हेलिवाल, अजय केशरी, कृष्ण कन्हैया राय, शशिकांत अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, शुभम अग्रवाल, आनंद खंडेलवाल, मैनेजर कुंवर, हरीश तांबी, रोहित ¨सघल सहित कई मौजूद थे। ---------------- रासलीला में कलाकारों ने किया अभिमन्यु की वीरता का मंचन संस, कतरास: गंगा गोशाला कतरास के प्रांगण में चल रहे गोपाष्टमी महोत्सव के छठे दिन रविवार को श्रीधाम वृंदावन के रासलीला मंडली द्वारा अभिमन्यु की वीरता के प्रसंग का मंचन किया गया। जयप्रिया शरण के निर्देशन में रासलीला को देख लोगों ने भरपूर आनंद उठाया। श्रीकृष्ण के भांजा तथा अर्जुन व सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु की कथा का मंचन ने लोगों में जोश भर दिया। पूरे लीला में वीररस से सराबोर रहा। लीला में अभिमन्यु वीरता की गाथा तथा उनके प्रतिभाशाली की वर्णन किया गया। वे चक्रव्यूह तोड़ना तो जानते थे लेकिन उससे बाहर निकलना नहीं जानते थे। इस चक्रव्यूह को सिर्फ तोड़ने वाले और निकलने वाले अर्जुन थे, जिन्हें श्रीकृष्ण ने युद्ध के लिये भेज दिया था। उनका युद्ध राक्षसों के बीच चल रहा था।

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